Shopping in Pitru Paksha Auspicious or Inauspicious: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व दिया गया है. पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है. इस पखवाड़े को पितरों का स्मरण और उन्हें श्रद्धांजलि देने का समय कहा गया है. इन 15 दिनों के दौरान लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. लेकिन, कई बार अनजाने में की गई गलतियां पुण्य को व्यर्थ कर देती हैं और पाप का कारण बन सकती हैं. कहते हैं कि पितृ पक्ष में कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर इन चीजों को पितृ पक्ष के दौरान खरीदा जाता है, तो घर-परिवार पर पितृ दोष का संकट मंडराने लगता है. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष में किन चीजों की खरीददारी नहीं करनी चाहिए.
क्या होता है पितृदोष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब पितरों की आत्माएं तृप्त नहीं होतीं, तो वे अपने वंशजों को कष्ट देती हैं. इसे ही पितृदोष कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी पूर्वज अपनी संतान और परिवार पर दृष्टि रखते हैं. पितृ पक्ष के दिनों में वे धरती पर आकर अपने प्रियजनों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. इसीलिए इस काल में कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है.
पितृ पक्ष में भूल से भी ना खरीदें ये चीजें
शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष की अवधि में जूते, चप्पल और नए वस्त्र खरीदने से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा इस दौरान सोना-चांदी खरीदना अशुभ माना गया है. वहीं, इस दौरान विवाह, सगाई जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए. पितृ पक्ष में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, अंडा, मांस और मछली का सेवन निषेध है. इसलिए पितृ पक्ष में हर किसी को इस नियम का पालन करना चाहिए. जबकि, शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में धार्मिक कार्यों में अधिक समये देना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. साथ ही, इस अवधि में किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए और ना ही किसी को अपशब्द कहने चाहिए.
पितरों की कृपा दिलाने वाले मंत्र
पितृ मंत्र- “ॐ श्री पितराय नमः”.
पितृ गायत्री मंत्र- “ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्”.
पितृ नमन मंत्र- “ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः”.
पितृ शांति के लिए शिव गायत्री मंत्र- पितृ पक्ष में “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात्”
पितृ दोष निवारण मंत्र- “ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः”