Pitru paksha Shradh Time: पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में खास महत्व है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक चलते हैं। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण व पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों को जल अर्पित करने, पिंडदान व श्राद्ध करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितरों का श्राद्ध करने के लिए कुछ मुहूर्त अत्यंत उत्तम माने गए हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध कभी भी शाम को नहीं करना चाहिए। जानें पितृ पक्ष में पितरों के श्राद्ध करने का सही समय व श्राद्ध की तिथियां।
पितृ पक्ष कब से हो रहे हैं प्रारंभ: इस साल पितृ पक्ष 07 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर तक चलेंगे। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण व समापन सूर्य ग्रहण से होगा। पितृ पक्ष सर्वपितृ अमावस्या को समाप्त होते हैं।
श्राद्ध करने का सही समय क्या है: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म दोपहर के समय करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध करने का कुतुप काल सुबह 11:36 मिनट से दोपहर 12:24 बजे तक माना गया है। मान्यता है कि दोपहर एक बजे से पहले श्राद्ध कर लेना चाहिए।
श्राद्ध की तिथियां-
पूर्णिमा तिथि श्राद्ध – 7 सितंबर 2025
प्रतिपदा तिथि श्राद्ध – 8 सितंबर 2025
द्वितीया तिथि का श्राद्ध – 9 सितंबर 2025
तृतीया तिथि का श्राद्ध/ चतुर्थी तिथि का श्राद्ध – 10 सितंबर
पंचमी तिथि का श्राद्ध – 11 सितंबर
षष्ठी तिथि का श्राद्ध – 12 सितंबर 2025
सप्तमी तिथि का श्राद्ध – 13 सितंबर 2025
अष्टमी तिथि का श्राद्ध – 14 सितंबर 2025
नवमी तिथि का श्राद्ध – 15 सितंबर 2025
दशमी तिथि का श्राद्ध – 16 सितंबर 2025
एकादशी तिथि का श्राद्ध – 17 सितंबर 2025
द्वादशी तिथि का श्राद्ध – 18 सितंबर 2025
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध – 19 सितंबर 2025
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध – 20 सितंबर 2025
सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध – 21 सितंबर 2025