स्कैमर्स की आएगी शामत! Digital Arrest रोकने के लिए सरकार का मास्टरप्लान; WhatsApp पर अब नंबर नहीं, सीधे फोन होगा ब्लॉक

Govt Action on Digital Arrest Scams: अभी तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम का भूत लोगों को परेशान कर रहा है. इसमें स्कैमर्स कभी सीबीआई अफसर बनकर तो कभी पुलिसवाले बनकर लोगों के साथ वीडियो कॉल करते हैं और घंटों घर में ही ‘कैद’ रहने को मजबूर कर देते हैं. इस चक्कर में कई लोग अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठते हैं. लेकिन अब सरकार ने इन जालसाजों पर नकेल लगाने का पूरा इंतजाम कर लिया है. सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (WhatsApp) को दो टूक कह दिया है कि अब सिर्फ नंबर बंद करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन डिवाइस (फोन) को ही ब्लॉक करना होगा, जिनका इस्तेमाल इन घोटालों के लिए किया जा रहा है. भारत सरकार की एक हाई लेवल कमेटी ने वॉट्सऐप (WhatsApp) को ये सख्त निर्देश दिए हैं.

सिर्फ सिम नहीं, अब पूरा फोन होगा बेकार
हाल ही में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में गृह मंत्रालय और IT विभाग के बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस मीटिंग में यह बात निकलकर आई कि स्कैमर्स बड़े शातिर होते हैं. जैसे ही उनका एक नंबर ब्लॉक होता है, वे नया सिम लेकर फिर से स्कैम शुरू कर देते हैं. लेकिन अब सरकार ने डिवाइस आईडी (Device ID) को निशाना बनाने का फैसला किया है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी खास मोबाइल फोन से ठगी की जा रही है, तो वॉट्सऐप उस फोन की पहचान कर उसे हमेशा के लिए ब्लॉक कर देगा. जिसके बाद स्कैमर उस हैंडसेट पर फिर कभी वॉट्सऐप नहीं चला पाएगा.

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
पिछले कुछ महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में बाढ़ सी आ गई है. इसमें स्कैमर्स अक्सर विदेश (खासकर कंबोडिया, वियतनाम और थाईलैंड) से ऑपरेट करते हैं. यहां से वे भारतीयों को कॉल करके डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल आया है या उनके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. डरा-धमकाकर वे लोगों को वीडियो कॉल पर रखते हैं और लाखों रुपये वसूल लेते हैं. सरकार का मानना है कि अगर डिवाइस को ही ब्लॉक कर दिया जाए, तो इन स्कैमर्स का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा.

आम जनता के लिए राहत की बात
सरकार के इस कदम से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो टेक्नोलॉजी के मामले में थोड़े कच्चे हैं. अक्सर बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग इन शातिर स्कैमर्स के जाल में फंस जाते हैं. वॉट्सऐप को ये निर्देश मिलने के बाद अब फर्जी कॉल और मैसेज में कमी आने की उम्मीद है. इसके साथ ही, सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को भी संदिग्ध इंटरनेशनल कॉल्स पर नजर रखने को कहा है.

डेटा सुरक्षित रखने पर भी जोर
सरकार ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में जरूरी जानकारी कुछ समय तक सुरक्षित रखी जाए. कई बार ठग अपना अकाउंट या डेटा तुरंत हटा देते हैं, जिससे जांच मुश्किल हो जाती है. अगर डेटा सुरक्षित रहेगा, तो पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में आसानी होगी.

आप कैसे रहें सावधान?
भले ही सरकार सख्ती कर रही है, लेकिन आपकी सावधानी में ही सुरक्षा है. याद रखिए, भारत में कोई भी जांच एजेंसी, चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई हो या ईडी हो, कभी भी फोन पर किसी को ‘अरेस्ट’ नहीं करती और न ही वीडियो कॉल पर बयान लेती है. अगर आपके पास ऐसा कोई कॉल आए, तो घबराएं नहीं. तुरंत फोन काटें और साइबर हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं.