हाल ही में चाइनीज मोबाइल कंपनी VIVO ने अपनी एक नई रिपोर्ट साझा की है. गौरतलब है कंपनी ने बताया की माता-पिता के साथ बच्चों में फोन चलाने की आदत काफी बढ़ चुकी है. अब बच्चे बिना मोबाइल के खाना तक खाने में आनाकानी करते हैं. फोन की दुनिया में लोग इतने ज्यादा इनोवोल्ब हो जा रहे हैं कि उनके निजी रिश्ते भी खराब हो जा रहे हैं.
हाल ही में चाइनीज मोबाइल कंपनी VIVO ने अपनी एक नई रिपोर्ट साझा की है. गौरतलब है कंपनी ने बताया की माता-पिता के साथ बच्चों में फोन चलाने की आदत काफी बढ़ चुकी है. अब बच्चे बिना मोबाइल के खाना तक खाने में आनाकानी करते हैं. यही वजह है कि बच्चों का मानसिक संतुलन दिन पर दिन बिगड़ता जा रहा है. Vivo की अपनी एनुअल स्विच ऑफ रिपोर्ट का 7वां एडिशन जारी किया है. यही नहीं रिसर्च के बाद कंपनी ने स्विच ऑफ इनिशिएटिव की शुरुआत भी की है. फोन की दुनिया में लोग इतने ज्यादा इनोवोल्ब हो जा रहे हैं कि उनके निजी रिश्ते भी खराब हो जा रहे हैं.
खाना खाने के समय में फोन
गौरतलब है आजकल की जनरेशन टेक्नोलॉजी में इतनी ज्यादा व्यस्त हो जा रही है. इससे पहले लोग बिना फोन के साथ-साथ उठते बैठते थे और खाते भी थे. यही नहीं आजकल के बच्चों ने फिजिकल एक्टिविटी भी एकदम कम कर दी है. इस वजह से उनका शारीरिक विकास भी काफी सीमित हो चुका है. वीवो की इस रिसर्च में दो चीजें जरूर सामने आई हैं. पहला खाने का समय परिवार के लिए काफी जरूरी बन गया है. इसी समय वह एक दूसरे से बातचीत कर सकते हैं. इसके साथ ही बच्चों को यह महसूस होने लगा है कि उनके माता-पिता उनके साथ समय नहीं बताते हैं.
ये रही वीवो की रिसर्च
Vivo की इस रिसर्च ने लोगों के सामने ये उजागर करने की कोशिश कि परिवार बदलते ही दुनिया के साथ कैसे तालमेल बैठाया जाए. आइए जानते हैं रिसर्च के बारे में. 1- खाना खाने के दौरान 72 परसेंट पैरेंट्स और 30 परसेंट बच्चे अपने स्मार्टफोन को चेक करते हैं. 2- पेरेंट्स जहां 4 घंटे वहीं बच्चे 3 घंटे फोन चलाते रहते हैं. 3- पैरेंट्स और बच्चों दोनों का फोन चलाने का तरीका अलग-अलग है. जहां पैरेंट्स काफी थोड़ा मोबाईल यूज करते हैं वहीं, बच्चे बार-बार अपना फोन चेक करते हैं. 4 – 70 परसेंट बच्चे ऐसे हैं जो अपने माता-पिता के बिजी वजह होने की वजह AI का इस्तेमाल करते हैं और AI से ही बातचीत करते हैं.
अनस्किल्ड बच्चे
पहले की तुलना में स्कूल के छोटे बच्चे भी AI की मदद के सहारे अपने होमवर्क और प्रोजेक्ट वर्क खुद पूरा कर ले रहे हैं. बदलते हुए एजुकेशन के माहौल को देखते हुए बोलें तो 54 परसेंट बच्चे AI का डेली इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका काम तो हो जाएगा,लेकिन नॉलेज के मामले में और स्किल के मामले में वह काफी पीछे रह जाएंगे.