बहुत से लोगों को लगता है कि कार चलाते समय फोन चार्ज करने या Bluetooth इस्तेमाल करने से ईंधन की खपत बढ़ जाती है. हालांकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्टफोन चार्जिंग और Bluetooth मिलाकर भी कार के अल्टरनेटर पर 20 वॉट से कम अतिरिक्त लोड डालते हैं. इसका असर ईंधन दक्षता पर 0.05 प्रतिशत से भी कम पड़ता है, जो व्यावहारिक रूप से लगभग नगण्य माना जाता है.
फोन चार्ज करने में कितनी बिजली लगती है?
कार के USB पोर्ट से एक सामान्य स्मार्टफोन चार्ज करने के लिए लगभग 5 से 15 वॉट बिजली की जरूरत होती है. यह ऊर्जा कार के अल्टरनेटर से आती है, जिसे इंजन चलाता है. लेकिन इतनी कम बिजली पैदा करने के लिए इंजन को बहुत मामूली अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है. यही वजह है कि ड्राइवर को इसके कारण किसी तरह का प्रदर्शन या माइलेज अंतर महसूस नहीं होता.
माइलेज पर कितना असर पड़ता है?
एक औसत कार इंजन हाईवे पर चलते समय हजारों वॉट ऊर्जा पैदा करता है. ऐसे में 10-15 वॉट का अतिरिक्त लोड बेहद छोटा होता है. अनुमान के मुताबिक फोन चार्जिंग से कार की फ्यूल एफिशिएंसी में केवल 0.03 प्रतिशत तक की कमी आती है. इसका मतलब है कि आपको हजारों किलोमीटर ड्राइव करनी होगी, तब जाकर एक लीटर पेट्रोल के बराबर अतिरिक्त ईंधन खर्च होगा.
जेब पर कितना असर पड़ता है?
अगर आप रोज ऑफिस आते-जाते समय फोन चार्ज करते हैं, तो इसकी लागत लगभग न के बराबर है. एक स्मार्टफोन को 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज करने के लिए जितनी अतिरिक्त बिजली चाहिए, उसके लिए इंजन द्वारा खर्च किया गया अतिरिक्त ईंधन आमतौर पर 2 रुपये से भी कम कीमत का होता है. इसलिए फोन चार्जिंग आपके मासिक पेट्रोल बजट को प्रभावित नहीं करती.
Bluetooth इस्तेमाल करने से क्या होता है?
कार में Bluetooth के जरिए म्यूजिक स्ट्रीमिंग करना या कॉल पर बात करना बेहद कम ऊर्जा का उपयोग करता है. एक सामान्य Bluetooth मॉड्यूल केवल 2.5 मिलीवॉट बिजली पर काम कर सकता है. यह खपत इतनी कम होती है कि अल्टरनेटर पर इसका कोई मापने योग्य दबाव नहीं पड़ता. इसलिए Bluetooth का उपयोग आपकी कार की माइलेज को प्रभावित नहीं करता.
असली बिजली कौन खाता है?
अगर कार के अंदर किसी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की बिजली खपत ज्यादा है, तो वह इंफोटेनमेंट स्क्रीन होती है. नेविगेशन, मीडिया और Bluetooth कंट्रोल के लिए इस्तेमाल होने वाली बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगभग 20 से 50 वॉट तक बिजली खींच सकती हैं. फिर भी इनका प्रभाव एयर कंडीशनर की तुलना में बेहद कम होता है और ईंधन खपत पर इसका असर बहुत मामूली रहता है.
अल्टरनेटर कितनी दक्षता से काम करता है?
कार का अल्टरनेटर इंजन की यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदलता है और इसकी औसत दक्षता लगभग 60 प्रतिशत होती है. ऊर्जा परिवर्तन के दौरान कुछ नुकसान जरूर होता है, लेकिन आधुनिक अल्टरनेटर छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से संभाल लेते हैं. दिलचस्प बात यह है कि फोन चार्जिंग से पैदा होने वाला अतिरिक्त इंजन लोड रात में हेडलाइट्स जलाने से होने वाले लोड से भी कम होता है.
ईंधन बचाना है तो क्या करें?
यदि आपका लक्ष्य पेट्रोल या डीजल बचाना है, तो फोन का चार्जर निकालने से कोई खास फायदा नहीं मिलेगा. कार का एयर कंडीशनिंग सिस्टम अकेले ही केबिन के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तुलना में 10 गुना से अधिक इंजन शक्ति का उपयोग कर सकता है. बेहतर माइलेज के लिए AC का संतुलित उपयोग, स्थिर गति से ड्राइविंग और अनावश्यक तेज एक्सेलेरेशन से बचना कहीं ज्यादा प्रभावी उपाय हैं. फोन चार्जिंग और Bluetooth को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.