गर्मियों का मौसम आते ही कार में बैठते ही ऐसा लगता है मानो हम किसी तंदूर के अंदर आ गए हों. ऐसे में हम तुरंत AC को फुल स्पीड पर चालू कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कार का रंग सीधे आपकी जेब पर असर डाल रहा है? जी हां, यह कोई मजाक नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक सच है. अगर आपकी कार का रंग डार्क यानी काला या कोई और गहरा रंग है, तो वह हल्के रंग की कार के मुकाबले ज्यादा पेट्रोल पी रही है. आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा गणित.
वैज्ञानिकों और रिसर्च के मुताबिक डार्क कलर की कारें सीधे सूरज की रोशनी से बहुत ज्यादा थर्मल एनर्जी यानी गर्मी सोखती हैं. अगर आप एक सफेद कार और एक काली कार को ठीक एक ही जगह पर धूप में खड़ी कर दें, तो काली कार के अंदर का तापमान सफेद कार के मुकाबले आसानी से 5 से 6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बढ़ जाता है. यही वजह है कि काली कार में बैठते ही ज्यादा गर्मी का अहसास होता है.
60 फीसदी तक रोशनी को रिफ्लेक्ट करते हैं हल्के रंग
इसके ठीक उलट, सिल्वर और सफेद जैसे हल्के रंग नेचुरल सोलर रिफ्लेक्टर का काम करते हैं. सफेद रंग की गाड़ी अपने ऊपर पड़ने वाली सूरज की रोशनी को लगभग 60 फीसदी तक वापस बाउंस यानी रिफ्लेक्ट कर देती है. इससे दोपहर की चिलचिलाती धूप में भी कार के केबिन के अंदर उतनी ज्यादा गर्मी जमा नहीं हो पाती, जितनी किसी डार्क कार में होती है.
AC चलाने से 20 फीसदी तक गिर जाता है माइलेज
जब गर्मियों में कार का AC अपनी पूरी ताकत यानी मैक्सिमम पावर पर चलता है, तो इससे गाड़ी के इंजन पर बहुत भारी मैकेनिकल लोड पड़ता है. पीक समर यानी भयंकर गर्मी के दौरान लोकल सिटी रोड्स पर लगातार AC चलाने से आपकी गाड़ी का कुल फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) 20 फीसदी तक घट जाता है. यानी कार को ठंडा रखने के लिए इंजन को बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है.
2 फीसदी ज्यादा जलता है पेट्रोल
चूंकि डार्क कलर की कारें बहुत ज्यादा गर्म हो जाती हैं, इसलिए उनके ड्राइवर को कार को ठंडा करने के लिए लंबे समय तक AC को फुल ब्लास्ट पर चलाना पड़ता है. इस लंबे कूलिंग साइकल के कारण इंजन को ज्यादा काम करना पड़ता है. नतीजतन, एक ही डेली कम्यूट (रोज के रास्ते) पर एक हल्के रंग की कार की तुलना में काली कार लगभग 2 फीसदी ज्यादा पेट्रोल फूंक देती है.
प्रदूषण भी होता है कम
अगर आप हल्के रंग की कार चुनते हैं, तो यह सिर्फ आपके पैसे ही नहीं बचाती बल्कि पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होती है. स्टडीज से पता चलता है कि सफेद कारें टेलपाइप एमिशन (धुआं) को लगभग 1.9 फीसदी तक कम कर देती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंजन को कूलिंग कंप्रेसर चलाने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है, जिससे प्रदूषण कम होता है.
AC का इस्तेमाल 13 फीसदी कम
जब कार का केबिन प्राकृतिक रूप से कम गर्म होगा, तो क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम आपके मनमुताबिक तापमान को बहुत जल्दी हासिल कर लेगा. हल्के रंग के वाहनों को पैसेंजर्स को आराम देने के लिए लगभग 13 फीसदी कम AC कैपेसिटी की जरूरत होती है. इससे पेट्रोल इंजन पर बेवजह का दबाव नहीं बनता और गाड़ी स्मूथ चलती है.
हर महीने होगी 200 रुपये से ज्यादा की बचत
सुनने में 2 फीसदी की फ्यूल एफिशिएंसी में गिरावट बहुत छोटी लग सकती है. लेकिन जो लोग हर दिन कार से लंबा सफर तय करते हैं, उनकी जेब पर इसका सीधा असर पड़ता है. गर्मियों के लंबे और भारी सीजन में सिर्फ एक सफेद या सिल्वर रंग की कार चुनकर आप हर महीने अपने पेट्रोल के बिल पर 200 रुपये से ज्यादा की सीधी बचत आसानी से कर सकते हैं.