क्या कार का माइलेज खुद नहीं नापा जा सकता? जानें नितिन गडकरी के दावे का सच और माइलेज चेक करने का सबसे सही तरीका

देशभर में जब से E20 पेट्रोल यानी 20% एथेनॉल ब्लेंड की एंट्री हुई है, तब से वाहन मालिकों के बीच कार के माइलेज को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर कई ड्राइवरों ने दावा किया है कि नए पेट्रोल से उनकी गाड़ियों का माइलेज अचानक कम हो गया है. लेकिन इस पूरी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने सबको चौंका दिया है. गडकरी का कहना है कि कोई भी आम आदमी अपनी कार का माइलेज खुद से नहीं नाप सकता, इसके लिए केवल कंपनी के ऑथराइज्ड डीलर की मशीन ही एकमात्र जरिया है.

लेकिन क्या यह बात पूरी तरह सच है? ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के नियमों के मुताबिक, यह दावा पूरी तरह सही नहीं है. आइए जानते हैं कि आप खुद घर बैठे अपनी कार का बिल्कुल सटीक माइलेज कैसे जान सकते हैं.

डैशबोर्ड का माइलेज कितना भरोसेमंद?
आजकल की लगभग ज्यादातर कारों के स्क्रीन पर माइलेज दिखाई देता है. इसे कार का कंप्यूटर इंजन के लोड, स्पीड और फ्यूल इंजेक्शन के हिसाब से तय करता है. लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं होता है. यह पूरी तरह से सिर्फ एक अनुमान होता है, एकदम परफेक्ट नहीं होता है.

अगर आप कार में एसी चलाते हैं, ट्रैफिक जाम में फंस जाते हैं या फिर ड्राइविंग कुछ अलग तरह से करते हैं तो यह स्क्रीन पर दिखने वाले माइलेज से 2% से 10% तक अलग हो सकता है. यह आपको एक अंदाजा तो देता है, लेकिन इस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता.

टैंक-टू-टैंक मेथड
सबसे परफेक्ट तरीका है कार का माइलेज जानने का टैंक-टू-टैंक मेथड. यह गोल्ड स्टैंडर्ड तरीका भी माना जाता है. इसके लिए आपको किसी डीलर के पास जाने की जरूरत नहीं होती है. आप खुद से माइलेज निकाल सकते हैं. माइलेज नापने का आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका ये रहा-

टैंक फुल कराएं
सबसे पहले अपनी कार की टंकी को किसी पेट्रोल पंप पर ऑटो कट-ऑफ होने तक फुल कराएं.

इसके बाद ट्रिप मीटर जीरो करें.
अब अपनी कार को रोजाना की तरह तब तक चलाएं जब तक कि दोबारा पेट्रोल डलवाने की जरूरत न पड़े.

हो सके तो उसी पेट्रोल पंप पर फिर से पेट्रोल को ऑटो कट-ऑफ होने तक फुल कराएं. अब नोट करें कि इस बार कितने लीटर पेट्रोल आया और आपकी कार कितने किलोमीटर चली.

ऐसे करें कैलकुलेशन
अपनी कार के माइलेज का पता लगाने के लिए इस सिंपल फॉर्मूले का इस्तेमाल करें

माइलेज (kmpl)} = तय की गई दूरी (KM)/ दोबारा डाला गया कुल ईंधन (Litres)

जैसे आपकी कार पिछले फुल टैंक के बाद 520 किलोमीटर चली और दोबारा फुल कराने पर उसमें 40 लीटर पेट्रोल आया, तो आपकी कार का असली माइलेज होगा:

520 \ 40 = 13

अगर आप यह प्रक्रिया 3 से 4 बार करते हैं, तो आपको अपनी कार का सबसे सटीक और रियल-वर्ल्ड माइलेज मिल जाएगा.

तो क्या डीलर की मशीन जरूरी है?
डीलर के पास मौजूद डायग्नोस्टिक मशीनें इंजन की कमियों या सेंसर की खराबी को जान सकती हैं, जो माइलेज कम होने का कारण हो सकती है. लेकिन ये मशीनें सड़क पर कार का असली माइलेज नहीं नापतीं. कंपनियों की गाड़ियों का ऑफिशियल माइलेज भी लैब के अंदर कंट्रोल्ड माहौल में टेस्ट होता है, न कि डीलर की मशीनों से.

नितिन गडकरी का यह कहना कि कार मालिक खुद माइलेज नहीं नाप सकते, तकनीकी रूप से सही नहीं है. स्क्रीन का माइलेज आपको हिंट देता है, लेकिन टैंक-टू-टैंक मेथड आज भी कार का असली माइलेज जानने का सबसे बेस्ट तरीका टैंक टू टैंक ही है.