UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में इस वक्त हर राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी जहां पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से भाजपा को चुनौती देने की जुगत में है तो वहीं बसपा ने भी दलित-मुस्लिम-पिछड़ा (डीएमपी) को जोड़ने को अभियान शुरू कर दिया है। अब यूपी के रण में पीडीए बनाम डीएमपी होता दिख रहा है।
2027 के रण में भाजपा को हराकर सत्ता के सिंहासन कब्जे का दावा कर रहे दोनों राजनीतिक दल, अपना-अपना वोटर बेस बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सियासी जानकार अभी यह कहने से बच रहे हैं कि कौन किसको चुनौती दे पाएगा। हालांकि वे इतना जरूर कह रहे हैं कि मायावती के नए डीएमपी दांव से अब तक पिछडा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) फॉमूले को अचूक हथियार मान रहे अखिलेश यादव को थोड़ी टेंशन जरूर हो सकती है।
बसपा नए अभियान के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में दो-दो संयोजक बना रही है। ये संयोजक हर बूथ पर 120-120 दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के लोगों को सह-संयोजक बनाएंगे। फिर यं सह-संयोजक भाईचारा कमेटियों की मदद से बूथ स्तर तक पार्टी की नीतियों के बारे में जानकारी देकर लोगों में पार्टी की पैठ बनाएंगे।
मायावती ने ताबड़तोड़ बैठकों से पार्टी को किया ऐक्टिव
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीते नौ अक्तूबर को कांशीराम परिनिर्वाण दिवस के बाद एक के बाद एक ताबड़तोड़ चार मीटिंग की और सख्त निर्देश दिए कि पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किया जाए। बूथ स्तर तक पार्टी की मजबूती पर जोर दिया जा रहा है। मायावती ने चार बार मुख्यमंत्री रहते हुए दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए क्या-क्या कार्य किए उसकी सूची पार्टी पदाधिकारियों को बनाकर सौंपी गई है।
सपा के पीडीए की काट के लिए बसपा भी इन्हीं वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए मैदान में उतर गई है। बसपा के लखनऊ मंडल के कोआर्डिनेटर सरवर मलिक ने लगातार विधानसभा क्षेत्रों में बैठक कर संयोजक बनाने के काम में जुटे हुए हैं। बूथ स्तर पर पदाधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह छोटी-छोटी टोलियां बनाकर लोगों के बीच जाएं और उन्हें बसपा से जोड़ने का काम करें। अलीगढ़ मंडल के कोआर्डिनेटर रामदास सविता की ओर से भी मंडल की विधानसभा सीटों पर संयोजक बनाने का काम शुरू हो गया है।
बसपा में गुपचुप ढंग से शुरू हुआ प्रत्याशी चयन
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने गुपचुप ढंग से प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी एक वर्ष से अधिक का समय बाकी है। मगर पार्टी जनाधार वाले योग्य लोगों को चुनेगी। ऐसे में इस बार लंबी-चौड़ी प्रक्रिया होगी। प्रत्याशी का दमखम भी देखा जाएगा। फिर दावेदारों में से एक दावेदार को पार्टी टिकट देगी।