Mayor Salary in UP: मेयर (महापौर) किसी शहर या नगर पालिका का मुख्य अधिकारी होता है, जो शहर के विकास और प्रशासन का मुखिया होता है. महापौर “शहर का प्रथम नागरिक” कहलाता है और शहर की नीतियों को बनाने व लागू करने, सार्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन करने और शहर का प्रतिनिधित्व करने जैसी जिम्मेदारियां निभाता है. जिसकी शक्तियाँ और चुनाव प्रक्रिया देश और शहर के अनुसार अलग-अलग (सीधे जनता द्वारा या पार्षदों द्वारा) हो सकती हैं. क्या आप जानते हैं यूपी के मेयर की सैलरी कितनी होती है. पहले जानते हैं मेयर के अधिकार क्या होते हैं.
क्या होते हैं मेयर के अधिकार?
मेयर स्थानीय नागरिक निकाय को नियंत्रित करता है. महापौर की भूमिका शहर की आवागमन, सफाई, विकास में महत्वपूर्ण होती है. इसके साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ नगर की विकास योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना काम होता है. जल, सीवर, सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाओं पर योजना बनाना और लागू कराना भी जिम्मेदारी है. महापौर शहर के प्रोटोकॉल में सबसे ऊपर होते हैं. नगर निगम में होने वाले सभी कार्य मेयर की मंजूरी के बाद ही किए जाते हैं. मेयर की मंजूरी के बाद ही किसी भी एजेंडे को सदन में रखा जाता है.शहर के विकास के लिए मेयर को 2 करोड़ रूपए (2021 के मुताबिक) राशि प्रदान की जाती है. इस राशि को मेयर अपने वार्ड को छोड़कर पूरे शहर में कहीं भी खर्च कर सकता है.
मेयर की सैलरी कितनी होती है?
2021 के आंकड़ों के मुताबिक मेयर की सैलरी अलग-अलग महापालिकाओं के हिसाब से तय होती है कि उन्होंने इसे क्या तय किया हुआ है लेकिन उसे खर्च और आफिस संबंधी कई भत्ते मिलते हैं. वैसे उनका न्यूनतम वेतन प्रतिमाह 30 हजार रुपए होते हैं.