गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज, यहां बनेगा औद्योगिक कॉरिडोर

बरेली। गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह एक्सप्रेसवे बरेली जिले के 53 गांवों से गुजरेगा। बहेड़ी में एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर प्रस्तावित है।

प्रदेश के सबसे लंबे गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का काम गति पकड़ने लगा है। बरेली जिले की बहेड़ी और नवाबगंज तहसीलों के 53 गांवों से गुजरते हुए यह एक्सप्रेसवे जिले में 100 किलोमीटर लंबा होगा। संबंधित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक के बाद अब भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे गंगा, यमुना एक्सप्रेसवे के साथ बरेली-नैनीताल हाईवे, बरेली-मथुरा हाईवे, बरेली-सितारगंज हाईवे और दिल्ली-लखनऊ हाईवे को सीधे कनेक्ट करेगा।

गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कराएगा। चयनित गांवों की भूमि का अधिग्रहण करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक आवागमन आसान हो जाएगा। उत्तराखंड से भी जुड़ाव मजबूत होगा। बरेली-सितारंज हाईवे का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके अलावा बरेली-मथुरा हाईवे का चौड़ीकरण भी अगले साल तक पूरा हो जाएगा। इस हाईवे से जहां बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे जुड़ रहा है, वहीं मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे से भी जुड़ाव हो रहा है।

भूमि अधिग्रहण के लिए कमेटी गठित
नवाबगंज के सात और बहेड़ी तहसील के 29 गांवों में एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा एनएचएआई की मुरादाबाद शाखा और नवाबगंज के 17 गांवों में निर्माण का जिम्मा बरेली शाखा को दिया गया है। सभी गांवों में एनएचएआई ने सर्वे भी पूरा कर लिया है। भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा एनएचएआई देगा, लेकिन इसके वितरण की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। भूमि अधिग्रहण के लिए एनएचएआई ने कमेटी का गठन भी कर दिया है।

बहेड़ी में भी विकसित किया जाएगा औद्योगिक कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बरेली-बदायूं रोड पर भमोरा में भी औद्योगिक कॉरिडोर पर काम चल रहा है। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बहेड़ी में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद कॉरिडोर के लिए भी जमीन ली जाएगी। इस कॉरिडोर का सीधा जुड़ा उत्तराखंड से होगा। इसका लाभ यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों को मिलेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी।

एनएचएआई के पीडी नवरत्न सिंह ने बताया कि गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुआवजा का भुगतान एनएचएआई करेगा। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर भी प्रस्तावित है।