बिजली उत्पादन क्षमता 50 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी, 4 बड़े पावर प्लांटों से जुड़ेगा 10600 मेगावॉट विस्तार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार योजना तैयार किया है। प्रदेश की बिजली आपूर्ति क्षमता को 22,000 मेगावॉट से बढ़ाकर 32,600 मेगावॉट करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें ओबरा-डी, अनपरा-ई, मेजा और मिर्जापुर पावर प्लांटों से कुल 10,600 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली उत्पादन जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि राज्य में केवल थर्मल ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत जालौन में 500 मेगावॉट का नया सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2034 तक प्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 55,840 मेगावॉट तक पहुंचाई जाए।

चार प्रमुख पावर प्लांटों का होगा क्षमता विस्तार
प्रदेश सरकार ने ओबरा-डी, अनपरा-ई, मेजा और मिर्जापुर स्थित पावर प्लांटों के विस्तार को प्राथमिकता दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से कुल 10,600 मेगावॉट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी। इससे न केवल औद्योगिक क्षेत्रों को राहत मिलेगी, बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं को भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, वर्ष 2017 में जहां प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता 11,803 मेगावॉट थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 22,000 मेगावॉट हो गई है। अब इसे और विस्तार देकर लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है।

सोलर और बायो एनर्जी पर भी जोर
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत यूपी देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। अप्रैल 2026 में यूपी प्रतिदिन सबसे अधिक इंस्टॉलेशन वाला राज्य रहा, जबकि लखनऊ इसमें प्रमुख शहर के रूप में उभरा है।

प्रदेश में अब तक 4 लाख से अधिक सोलर इंस्टॉलेशन के जरिए लगभग 1400 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है। अयोध्या को देश का पहला सोलर सिटी घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा 3000 मेगावॉट की सौर क्षमता पहले से स्थापित है और 11,000 मेगावॉट की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।

बायो एनर्जी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 स्थान पर पहुंच चुका है।

बिजली ढांचे में बड़ा बदलाव, तेजी से बढ़ी क्षमता
पिछले चार वर्षों में प्रदेश में बिजली ढांचे में बड़े स्तर पर सुधार किया गया है। इस दौरान 30 लाख से अधिक पोल बदले गए, 1.65 लाख किलोमीटर पुराने तार हटाए गए, 86 नए 132 केवी और 93 नए 33 केवी उपकेंद्र बनाए गए। साथ ही 1500 से अधिक उपकेंद्रों का अपग्रेडेशन किया गया और 10.71 लाख ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं।

ऊर्जा विभाग का दावा है कि इन सुधारों से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

प्रति व्यक्ति बिजली खपत में लगातार वृद्धि
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में प्रदेश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 489 यूनिट थी, जो 2022 में बढ़कर 518 यूनिट हो गई और अब यह 630 यूनिट तक पहुंच चुकी है। इससे यह स्पष्ट है कि राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

यूपी अब पीक डिमांड बिजली आपूर्ति में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

भ्रष्टाचार मामलों की जांच अब स्टेट विजिलेंस करेगी
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार ने बिजली विभाग के भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच स्टेट विजिलेंस को सौंपने का फैसला किया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, लगभग 10 भ्रष्टाचार और 20 आय से अधिक संपत्ति के मामलों को अब विजिलेंस जांच के तहत लाया जाएगा।

अब तक इन मामलों की जांच पावर कॉरपोरेशन की आंतरिक विजिलेंस द्वारा की जाती थी, लेकिन अब इसे एक स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाएगा ताकि जांच अधिक निष्पक्ष और सख्त हो सके।

स्मार्ट मीटर जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन को सौंप दी है, जिसे आगे शासन को भेज दिया गया है। हालांकि रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने रिपोर्ट को गोपनीय रखने पर आपत्ति जताई है और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है।