मेरठ: पश्चिमी यूपी एक बार फिर खुफिया एजेंसियों के रडार पर है। सहारनपुर से हाल ही में पकड़े गए आतंकी डॉक्टर अदील के मोबाइल से मिले संपर्कों ने सुरक्षा तंत्र को हिला दिया है। सूत्रों के अनुसार खुफिया विभाग STF और स्थानीय पुलिस पिछले कई दिनों से मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़ और रुड़की में लगातार कैंप कर जांच कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अदील के लिंक एक ताजा सक्रिय हुए स्लीपर सेल नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसकी भनक किसी को भी नहीं लगी थी।
सूत्रों की माने तो पिछले वर्षों में दिल्ली–NCR और पश्चिमी यूपी कई बार ISI समर्थित स्लीपर सेल के निशाने पर रहे हैं। मेरठ, कैराना, मुजफ्फरनगर और रुड़की जैसे इलाकों से कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं, इसलिए यह पूरा क्षेत्र खुफिया एजेंसियों के लिए संवेदनशील जोन माना जाता है। वजह यह कि ऐसे तत्व मुस्लिम आबादी में आम लोगों की तरह घुल-मिलकर रहते हैं, जिससे उन पर शक तक नहीं होता। जब खुलासा होता है तो लोग हैरान रह जाते हैं कि वही व्यक्ति आतंकी नेटवर्क से जुड़ा था या उसकी मदद कर रहा था। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछली बड़ी कार्रवाईयों के बाद इस नेटवर्क को लगभग खत्म मान लिया गया था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में संदिग्ध गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि एजेंसियों ने एक बार फिर सख्त निगरानी मोड अपनाया है।
मेरठ में 13–14 साल पुरानी घटना
मेरठ में आर्मी इंटेलिजेंस ने करीब 13–14 साल पहले एक बड़ी कार्रवाई की थी। कोतवाली क्षेत्र में फर्जी पहचान बनाकर रह रहे पाकिस्तानी नागरिक कामिल को पकड़ा गया था। उसने मेरठ की एक महिला से शादी कर ली थी और पहचान मिटाने के लिए अपना एक अंगूठा तक कटवा लिया था। तब आर्मी इंटेलिजेंस के मेजर ने डीआईजी प्रेम प्रकाश से बात कर उसे गिरफ्तार कराया था। यह मामला आज भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्लासिक केस माना जाता है।
आईबी और आर्मी की संयुक्त कार्रवाई
रुड़की से भी आईबी और आर्मी इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने असद, फुरकान और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनके तार सीधे पाकिस्तान की ISI से जुड़े पाए गए थे। ऐसी कई गिरफ्तारियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि पश्चिमी यूपी आतंकियों की निगरानी और नेटवर्किंग का पसंदीदा इलाका रहा है।
चुपचाप खड़ा कर रहा था बड़ा नेटवर्क
सहारनपुर से गिरफ्तार डॉक्टर अदील पर खुफिया एजेंसियों की खास नजर है। सूत्र बताते हैं कि वह पश्चिमी यूपी के जिलों में नए स्लीपर सेल की रीढ़ खड़ी कर रहा था। कई नंबरों का इस्तेमाल कर चेन-कम्युनिकेशन नेटवर्क चलाता था, उसके संपर्क वाले कई नंबर पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों तक पहुंचे फील्ड में काम कर रहे एजेंटों से गुप्त मुलाकात करता था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद साइलेंट तरीके से चल रहा था, जिसकी किसी स्थानीय एजेंसी को भनक तक नहीं लगी।
एजेंसियों ने कस लिया है शिकंजा
अदील के मोबाइल से निकले नंबरों और लोकेशन की मदद से सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर रही हैं। संभावित नए मॉड्यूल्स की निगरानी बढ़ा चुकी हैं। पश्चिमी यूपी में हॉटस्पॉट जोन चिह्नित कर चुकी हैं। बीते वर्षों में पकड़े गए एजेंटों के पुराने लिंक भी फिर से खंगाले जा रहे हैं। खुफिया विभाग को आशंका है कि अदील अकेला नहीं, बल्कि एक बड़े मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसमें कई स्लीपर सक्रिय हो चुके हैं।