यूपी पुलिस ने जिस वकील को पीटकर किया लहूलुहान, निकला मंत्री गिरिराज का दामाद

The lawyer beaten to a pulp by UP police turned out to be Minister Giriraj's son-in-law.

यूपी के वाराणसी में रथयात्रा चौराहे पर पुलिस से विवाद के बाद अधिवक्ता पिटाई से लहूलुहान हो गए। मामला बढ़ा तो देर रात भेलूपुर थाने पर अपराध निरीक्षक गोपाल कन्हैया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसके बाद अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) शिवहरि मीणा ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने आरोपी इंस्पेक्टर (क्राइम) गोपाल कन्हैया को निलंबित कर दिया है। दरअसल, पुलिस की पिटाई में लहूलुहान वकील की पहचान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के भाई जयराज सिंह के दामाद शिवप्रताप सिंह के रूप में की गई है। गिरिराज से कनेक्शन सामने आने के बाद घटनाक्रम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि वकील शिव प्रताप सिंह पत्नी के साथ बाइक से घर जा रहे थे। भीषण जाम लगा था। अधिवक्ता बाइक से चौराहे पर आगे निकलने लगे। इसी बात पर पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों में से एक ने उन पर हमला कर दिया। परिजनों के अनुसार उन्हें बीएचयू ट्रामा सेंटर ले जाया गया। उधर, कुछ अधिवक्ता ट्रॉमा सेंटर पहुंच कर प्रदर्शन करने लगे। एसीपी काशी गौरव कुमार उन्हें समझा कर शांत कराया।

इसके बाद सोमवार को सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई और उसे अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति और प्रशासनिक जज को पूरे मामले से अवगत कराने का निर्णय लिया गया।

सप्ताह बाद कचहरी में कामकाज सामान्य हुआ
पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच उपजे गतिरोध के समाप्त होने पर एक सप्ताह बाद सोमवार से कचहरी में कामकाज सामान्य हुआ। इससे पहले सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन की संयुक्त आम सभा बनारस बार एसोसिएशन के सभागार में हुई। इसमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देने के साथ हड़ताल खत्म करने की घोषणा हुई। बार पदाधिकारियों ने बताया कि पुलिस कमिश्नर ने विवाद के पटाक्षेप की पहल करते हुए मजिस्ट्रियल जांच का भरोसा दिया। अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी तथा उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने का भी आश्वासन दिया। बीते दिनों बड़ागांव और भेलूपुर थाना क्षेत्र में हुई घटना की जांच कराने पर भी सहमति बनी। आम सभा में आपस में प्रेम और सौहार्द बनाकर सुचारु रूप से कार्य करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।