लखनऊ: UP BJP News: यूपी बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव के लिए तैयारी पूरी हो गई है. चुनाव के लिए आवश्यक प्रांतीय परिषद के सदस्य चुन लिए गए हैं. 403 विधानसभा सीटों में से 327 सदस्य चुन लिए गए हैं. प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में प्रांतीय परिषद के सदस्य वोट डालते हैं.98 में से 84 संगठन जिलों के चुनाव भी संपन्न हुए हैं. अब किसी भी समय प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा की जा सकती है.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को उत्तर प्रदेश के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है.उनके लखनऊ पहुंचने पर नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होगी.संभावना है कि सोलह दिसंबर से पहले घोषणा हो जाए. 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है जो 14 जनवरी तक चलेगा. इस दौरान बीजेपी में बड़े काम न करने की परंपरा है.
बीजेपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 12 दिसंबर को यूपी बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है. पीयूष गोयल कल शाम को लखनऊ आ सकते है और परसों सुबह नामांकन की औपचारिकता पूरी कर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का एलान दोपहर बाद कर दिया जाएगा.संभावित दावेदारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, दलित नेता विद्यासागर सोनकर, पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का भी नाम है. निरंजन ज्योति ने कुछ दिनों पहले नड्डा से मुलाकात भी की थी.
आगरा और इटावा से लोकसभा सांसद रहे रामशंकर कठेरिया का नाम भी संभावितों की सूची में बताया जा रहा है. यूपी में दलितों की आबादी करीब 21 फीसदी है और 2027 विधानसभा चुनाव के पहले दलित या ओबीसी पर दोबारा दांव खेल सकती है. ऐसे में कठेरिया पर पार्टी दांव लगा सकती है. बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव के पहले समाजवादी पार्टी के PDA फार्मूले की काट के तौर पर भी पिछड़ा वर्ग या दलित वर्ग के किसी नेता को प्रदेश की कमान सौंप सकती है.
हालांकि अगर निरंजन ज्योति की बात की जाए तो पिछड़ा वर्ग की मल्लाह जाति से आने के साथ वो महिला भी हैं. ऐसे में महिला कार्ड भी भाजपा चल सकती है. बिहार, बंगाल, झारखंड से लेकर तमाम राज्यों के विधानसभा चुनाव में महिला वोटर गेमचेंजर के तौर पर सामने आई हैं. ऐसे में निरंजन ज्योति को भी प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के इतिहास की बात करें तो अभी तक कभी किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया गया है.
उत्तर प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्री हैं, जिनमें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ब्राह्मण वर्ग और केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी समाज से आते हैं. जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्षत्रिय समाज से आते हैं.