यूपी: भाजपा ने भांपी सियासी हवा, सपा सांसदों में टूट के दावों से हलचल

समाजवादी पार्टी के सांसदों में टूट के भाजपा और सहयोगी दलों के दावे ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के सहयोगी दल सुभासपा और निषाद पार्टी जिस तरह से सपा के सांसदों में टूट के दावे कर रहे हैं, उसने सवाल खड़े कर दिए हैं कि ये दावे कहीं सपा की पीडीए रणनीति के दबाव की परिणति तो नहीं हैं या इन दावों के पीछे सपा सांसदों में असंतोष की अंदरुनी हकीकत है। सपा ने जब से लोकसभा चुनाव-2024 में भाजपा को वर्ष 2004 के बाद करारी सियासी मात दी है, तब से भारतीय जनता पार्टी के खेमे में उसके पीडीए दांव को लेकर बेचैनी या यूं कहें खलबली सी कायम है।

सपा ने लोकसभा चुनावों में खासकर पूर्वांचल की करीब 28 संसदीय सीटों में से कांग्रेस के साथ 19 सीटें जीत ली थीं। भाजपा और अपना दल को महज़ नौ सीटों पर संतोष करना पड़ा था। यहीं से यूपी के दो बड़े सियासी दलों सपा-भाजपा में पीडीए की रणनीति को लेकर जंग शुरू हो गई। सपा के पूर्वांचल में जीते सांसदों में 10 ओबीसी और पांच दलित समाज से हैं। सपा के 10 ओबीसी सांसदों में से तीन प्रतापगढ़, बस्ती और अंबेडकरनगर के सांसद कुर्मी समाज से हैं।

भाजपा ने भांपी सियासी हवा
समय की सियासत को भांपते हुए ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने ओबीसी वर्ग के पूर्वांचल से आने वाले कुर्मी समाज के नेता पंकज चौधरी को संगठन की कमान सौंपी है। 2024 की हार ने एक बार फिर भाजपा को ओबीसी और दलितों पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर किया है। जानकार कहते हैं कि पू्र्वांचल में पीडीए या यूं कहें ओबीसी राजनीति पर असर रखने वाले सियासी दलों सुभासपा व निषाद पार्टी के साथ ही ओबीसी समाज के बड़े नेता केशव मौर्य को सपा के पीडीए पर हमला करने के लिए आगे किया गया है ताकि सपा की रणनीति को कमजोर किया जा सके।

मतभेद को भुनाने की कोशिश
मुरादाबाद से सांसद रुचिवीरा ने कहा कि पार्टी में टूट जैसी बातें बेबुनियाद हैं। ओम प्रकाश राजभर को गंभीरता से लेने की जरूरत ही नहीं है। पार्टी के सभी सांसदों की पूर्णनिष्ठा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव में है लेकिन उन्हें इस मामले की जांच करानी चाहिए कि कौन लोग महिला सांसद की अनदेखी कर गुटबाजी कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि इसी मुद्दे के चलते ओम प्रकाश राजभर ने असंतोष की आग में घी डालने का काम किया है। कुछ इसी तर्ज पर बलिया के सांसद सनातन पाण्डेय ने भी ओम प्रकाश राजभर को चुनौती देते हुए उनके दावों को खारिज किया है। उनको भी लखनऊ में 17 जून को पार्टी मुख्यालय में हुए प्रबुद्ध सम्मेलन में वाजिब तरजीह न दिए जाने की चर्चाएं हैं, जिनके सहारे ओम प्रकाश राजभर ने सपा को निशाने पर लिया है। ओम प्रकाश लगातार तीसरे दिन भी सपा पर हमलावर रहे।

राजभर ने पीडीए समारोह में रुचि वीरा की अनुपस्थिति पर उठाए थे सवाल
सुभासपा अध्यक्ष और राज्य सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को पीडीए समारोह में मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से एक बार फिर दावा किया कि सपा में बगावत की अगुआई बलिया से होगी।

राजभर ने एक्स पर की गई पोस्ट में लिखा, पीडीए समारोह में मुरादाबाद वाली सांसद नहीं पहुंचीं न? सांसद ने मना कर दिया न? बाद में कह रही होंगी कि बताया नहीं गया, सूचना नहीं मिली, छुपाया गया। क्या सच में यही हुआ है? जो कह रहा हूं मान लो। बगावत और बागियों को नेतृत्व तो ‘बागी बलिया’ कि भूमि ही करेगी क्योंकि ब्राह्मण सब भूल सकता है। अपमान नहीं। राजभर का इशारा सपा सांसद सनातन पांडेय की तरफ था।

बची पार्टी के अध्यक्ष बनेंगे असली चाचा
राजभर ने आगे लिखा है, घमंडी रामगोपाल ने मेरे और उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया है, उसे पूरे बहुजन समाज ने देखा और सुना है। रामगोपाल हमेशा से राजभर और मौर्य को नीचा समझते हैं। इनके घर में हमारे लिए अलग बर्तन रखा रहता है। राजभर ने दावा किया है कि सपा की बची हुई पार्टी का अध्यक्ष असली चाचा (शिवपाल यादव) ही बनेंगे क्योंकि वही दोबारा पार्टी खड़ी कर सकते हैं। दूसरे घमंडी चाचा, प्रोफेसर से प्राइमरी के मास्टर बनेंगे और इसे अखिलेश के ‘शिव’ चाचा हकीकत बनाएंगे।

सपा सांसद कोतवाली पहुंचे, दर्ज कराई शिकायत
वहीं, धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया और खीरी सांसद उत्कर्ष वर्मा शुक्रवार को सदर कोतवाली पहुंचे और पुलिस से शिकायत कर भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सपा नेताओं ने इसे सपा की छवि खराब करने की साजिश बताया है। भदौरिया की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। सांसद ने कहा कि सपा सांसद एकजुट हैं।

बिच्छू का मंत्र नहीं पता, सांप के बिल में डाल रहे हाथ
सांसद आनंद भदौरिया ने नाम लिए बगैर राज्य के एक मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘कुछ छुटभैये नेता बिच्छू का मंत्र नहीं जानते और सांप के बिल में हाथ डाल रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि टिप्पणी करने के बजाय नेताओं को अपने दल की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। ये सपा की छवि धूमिल करने की कोशिश है।