लखनऊ में बिजनौर थाना पुलिस ने मंगलवार को बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) क्लर्क परीक्षा 2025 में सॉल्वरों को बिठाने वाले गिरोह के सरगना आनंद कुमार और उसके आठ साथियों को बिजनौर तहसील के पास किसान पथ अंडर पास से दबोचा गया। आनंद संभल के खबूपुरा स्थित यूपी ग्रामीण बैंक में असिस्टेंट मैनेजर था। वह गैंग चल रहा था। पांच लाख रुपये लेकर परीक्षा में ईपीएफओ, ग्रामीण बैंक, यूको बैंक परीक्षा में बीटेक, बीएड छात्र बिठाता था। गिरोह के सदस्य अभ्यर्थी और सॉल्वरों की फोटो एआई से बना लेते थे।
पुलिस उपायुक्त दक्षिणी निपुण अग्रवाल के मुताबिक गिरोह का सरगना आनंद मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जनपद में काको इलाके के भरथुआ गांव का है। प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा से लेकर नौकरी लगवाने तक का पांच लाख रुपये में सौदा करता था। 20 हजार रुपये एडवांस लेता था। रविवार को गिरोह के सदस्य अभिषेक को पुलिस ने केंद्र से पकड़ा था। पूछताछ में पूरे गिरोह का पता चला। अपर पुलिस उपायुक्त आरपी बसंत कुमार के निर्देशन में बिजनौर थाना, क्राइम और सर्विलांस टीम को लगाया गया।
गैंग के गिरफ्तार आराेपियों में अधिकांश बिहार से
सुधांशु कुमार ग्राम कछियाना, थाना हमहरा, लखीसराय बिहार (यूको बैंक में स्केल-1 ऑफिसर)। भागीरथ शर्मा उर्फ चंदन निवासी गया (क्लर्क यूपी ग्रामीण बैंक, मुरादाबाद। गौरव आदित्य निवासी पटना, (अभ्यर्थी) हर्ष जोशी चम्पावत, उत्तराखंड (बीएससी छात्र), धनन्जय निवासी जहानाबाद (बीएड छात्र), राजीव नयन जहानाबाद (बीटेक छात्र), मुकेश निवासी गोपालगंज, (ईपीएफओ क्लर्क), आशीष रंजन नालन्दा (बीएससी छात्र), अभिषेक निवासी गया, बिहार।
गिरोह परीक्षा कार्यक्रम घोषित होते ही शिकार तलाशने लगता था
आईबीपीएस क्लर्क परीक्षा 2025 में सॉल्वर बिठाने वाला गिरोह परीक्षा कार्यक्रम घोषित होते ही शिकार तलाशने लगता था। तिथि के ऐलान के साथ अभ्यर्थियों को लालच देने का काम शुरू हो जाता था। गिरोह के सदस्य परीक्षा के पूर्व फार्म भरते समय ही अभ्यर्थी और सॉल्वरों की फोटो एआई से 70 फीसद तक हूबहू बना लेता था। इसे ही फार्म और फिर एडमिट कार्ड में लगकर आती थी। ऐसे में परीक्षा केंद्र में पहुंचने के बावजूद वहां निरीक्षकों को शक नहीं होता था। रविवार को गिरोह के सदस्य अभिषेक को पुलिस ने केंद्र से पकड़ा था।