नई दिल्ली। परिसीमन पर भारत में एक बार फिर से नॉर्थ बनाम साउथ का विवाद गहराता जा रहा है. तमिलनाडु के सीएम ने परिसीमन का आक्रामक विरोध किया है. और हर घर में काला झंडा लहराने का आह्वान किया है. दक्षिण के राज्यों को भय सता रहा है कि परिसीमन की वजह से लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा.
ये सारा विवाद महिला आरक्षण बिल पर चर्चाओं को लेकर शुरू हो गया है. पीएम मोदी ने कहा है कि वे 2029 के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व का आरक्षण लाभ देना चाहते हैं. इस कोशिश के लिए सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने जा रही हैं. सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा की सीटें 850 की जाए. इनमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेश के लिए होंगी.
केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल 2026 को तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के ड्राफ्ट सांसदों के बीच साझा किए हैं. ये विधेयक हैं-
लोकसभा में अब होंगे 850 सांसद… केंद्र सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट
1-संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
2-परिसीमन विधेयक, 2026
3-केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
ये तीनों बिल 16-18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में पेश किए जाएंगे.
ये तीनों विधेयक 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं. इसी अधिनियम में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था. अगर ये तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं, तो 2029 के अगले आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है.
इनसे लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी. यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा, ताकि 33% महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो सके.
ये 307 सीटें (850-543) कैसे बढ़ेंगी, किस राज्य की कितनी सीटें बढ़ेंगी. सीटों का बढ़ाने का आधार क्या होगा. एक राज्य की सीट ज्यादा क्यों बढ़ेगी तो दूसरे राज्य की सीट कम बढ़ेगी. सारा विवाद इसी को लेकर है.
दक्षिणी राज्य तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश आदि इस प्रस्ताव का सबसे तेज़ विरोध कर रहे हैं.
कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक पोस्ट में कहा है कि इस परिसीमन की वजह से दक्षिण के 5 राज्यों जिन्होंने अपनी जनसंख्या वृद्धि की दर को स्थिर किया है का लोकसभा में प्रतिनिधित्व घट जाएगा. इन राज्यों का प्रतिनिधित्व अभी 24.3 प्रतिशत है, परिसीमन के बाद ये घटकर 20.7 फीसदी हो जाएगा.
चिदंबरम ने कहा, “लोकसभा में तमिलनाडु का मौजूदा प्रतिनिधित्व 39 है. सरकार कहती है कि यह बढ़कर 58 हो जाएगा. मैंने कहा कि यह कोरा भ्रम है. जब परिसीमन किया जाएगा, तो यह 58 घटकर 46 रह जाएगा. वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की मौजूदा संख्या 80 है. यह पहले बढ़कर 120 होगी और परिसीमन के बाद यह और बढ़कर लगभग 140 तक पहुंच जाएगी.”
एक वीडियो संदेश में तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने बड़े पैमाने पर आंदोलनों की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को पूरी तरह से ठप कर देंगे अगर यदि राज्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया, या यदि परिसीमन में उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असंतुलित रूप से बढ़ाया गया, तो “पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन” किए जाएंगे.
एक और गैर बीजेपी शासित राज्य तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने PM मोदी को खुला पत्र लिखा. इसमें उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया. उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक योगदान पर विचार किए बिना आनुपातिक आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन में विकृति आ जाएगी.
रेड्डी ने कहा कि आनुपातिक मॉडल दक्षिणी राज्यों के लोगों और सरकारों को स्वीकार्य नहीं होगा और उनकी चिंताओं का समाधान किए बिना आगे बढ़ने का कोई भी प्रयास अनिवार्य रूप से व्यापक विरोध और प्रतिरोध को जन्म देगा, क्योंकि यह निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत को प्रभावित करता है. इसलिए उन्होंने कहा कि एक ऐसा सामूहिक समाधान खोजा जाना चाहिए जो न्यायसंगत और टिकाऊ दोनों हो.
सपोर्ट में चंद्रबाबू नायडू
केंद्र में सत्ता में साझीदार टीडीपी नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के राजनीतिक दलों और सभी सांसदों से संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में किए जा रहे संशोधनों को समर्थन देने का आग्रह किया. नायडू ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को मज़बूत करने का आह्वान किया.