गर्मी से राहत की उम्मीद जगी है. मानसून ने रफ्तार पकड़ी है और ये बंगाल की खाड़ी और लक्षद्वीप से आगे बढ़ते हुए केरल तमिलनाडु की ओर बढ़ रहा है. जून के आखिरी सप्ताह तक ये उत्तर भारत में पहुंच जाएगा. मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस बार मानसून कमजोर रह सकता है. इस पुर्वानुमान ने लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. सबसे ज्यादा चिंता पूर्वी यूपी में है, जहां पिछले कुछ सालों से पश्चिमी यूपी के मुकाबले कम बारिश हो रही है. यहां का देवरिया जिला तो पिछले साल भी प्यासा रह गया था.
देवरिया में पिछले साल पूरे देश में सबसे कम बारिश हुई थी. डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां सीजन में औसतन 759.4 मिलीलीटर बारिश होनी चाहिए थे, लेकिन सिर्फ 97.2 मिमी ही बारिश हुई. यानी बारिश के आंकड़ों में 87 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई. रिपोर्ट में कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक मन्धाता सिंह के हवाले से लिखा गया था कि पिछले तीन सालों से ये गिरावट हो रही है, लेकिन इतनी कम बारिश पहली बार हुई है.
पूर्वी और पश्चिमी यूपी की बारिश में कितना अंतर?
पिछले साल के आंकड़ों को आधार माना जाए तो पूरे उत्तर प्रदेश में सामान्य से 10 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई थी. हालांकि पूर्वी यूपी और पश्चिमी यूपी को अलग-अलग देखने से पता चलता है कि पश्चिम में सामान्य से 32 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई थी, जबकि पूरब में 3 प्रतिशत कम.
ये आंकड़ा पिछले साल अगस्त तक का था. पूर्वी यूपी में अकेले देविरया ही नहीं था, जहां बारिश कम हुई. गोरखपुर में सामान्य से 43 प्रतिशत, मऊ में 53 प्रतिशत और आजमगढ़ में 40 प्रतिशत कमी दर्ज की गई थी. बलिया में भी 21 प्रतिशत की कमी आई थी, जबकि पश्चिमी यूपी के कई जिलों में औसत से कई गुना ज्यादा बारिश हुई थी. अगर देश के लिहाज से देखें तो भारत के 727 जिलों में से 146 जिले ऐसे थे, जिन्होंने सामान्य से कम बारिश देखी थी.
पश्चिम यूपी में ज्यादा, पूर्वी यूपी में बारिश कम क्यों?
1- मानसून ट्रफ
मानसून किस रास्ते आगे बढ़ेगा यह मानसून ट्रफ ही तय करता है, यह कम वायुदाब वाला क्षेत्र हेाता है जो बंगाल की खाड़ी तक फैला है. जब यह सामान्य स्थिति में रहता है तो यूपी, बिहार और बंगाल में अच्छी बारिश होती है, अगर ये उत्तर की तरफ खिसक जाए उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बढ़िया बारिश होती है और पूर्वांचल के इलाके सूखे रह जाते हैं. ऐसी स्थिति में पहाड़ों पर बारिश ज्यादा होती है, मैदान सूखे रह जाते हैं.
2- पश्चिमी विक्षोभ
यह एक तूफानी मौसम प्रणाली है. यह भूमध्य सागर और पश्चिम एशिया की ओर से भारत की ओर आती है. सामान्य तौर पर इसे सर्दियों में उत्तर भारत में बर्फ बौर बारिश लाने का जिम्मेदार माना जाता है. हालांकि जलवायु परिवर्तन की वजह से अब पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम मानसून के मौसम में भी सक्रिय हो रहा है.
पिछले साल ही 2025 के मानसून सीजन में तकरीबन 15 पश्चिमी विक्षोभ दर्ज हुए थे. जब कोई पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान, हरियाणा या पश्चिमी यूपी से गुजरता है वह स्थानीय नमी को खींचकर प्री मानसूनी बारिश लाता है. पश्चिमी यूपी इनकी रेंज में है, अक्सर पूर्वी यूपी इनसे बाहर रहता है.
3- बंगाल की खाड़ी की नमी
देविरया बिहार की सीमा से लगता है. बिहार से आगे बंगाल की खाड़ी है. सामान्य मानसून में बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाएं पश्चिम की ओर बढ़ती हैं और पूर्वांचल में बारिश कराती हैं, लेकिन ऐसा तभी होता है जब बंगाल की खाड़ी में कोई लॉ प्रेशर सिस्टम सक्रिय हो और नमी को ऊपर उठाकर आगे धकेले, मानसून ट्रफ सामान्य रहे और पश्चिमी विक्षोभ नमी को आकर हाईजैक न कर ले.
4- हीट वेव
पश्चिम के मुकाबले पूर्वी यूपी में गर्मी अधिक पड़ती है. जमीन बेहद गर्म हो जाती है. बादल जब गर्म जमीन के ऊपर आते हैं तो जमीन से उठने वाली गर्म हवा बादलों को धक्का देती है. ऐसे में बादल बिना बरसे आगे खिसक जाते हैं. इस साल भी IMD ने 2026 के पुर्वानुमान में कहा कि यूपी में जून 2026 में सामान्य से अधिक गर्मी और लू की स्थिति रहेगी.
5- अल नीनो
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य ओर पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है. इससे मानसून कमजोर पड़ जाता है. 2015-16 में सुपर अल नीनो के हालात बने थे, जिसमें सामान्य से 86 प्रतिशत बारिश कम मिली. 2023 में भी बारिश में तकरीबन 36 प्रतिशत की कमी देखी गई थी. खास बात ये है कि अलनीनो का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होता. खासतौर से इसका असर मध्य और पूर्वी भारत पर पड़ता है.
इस बार फिर है कम बारिश की चेतावनी
IMD के मल्टी-मॉडल एंसेम्बल पूर्वानुमान के अनुसार, इस बार जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक अगर अलनीनो उम्मीद के मुताबिक विकसित हुआ तो भारत को एक बेहद असमान मानसून सीजन देखना पड़ सकता है. इससे कुछ इलाके सूखे से लड़ेंगे और कुछ बाढ़ से. मौसम विभाग ने जून में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में तीव्र लू चलने की चेतावनी दी है.