देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर 62 साल के प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने के लिए पुलिस को लताड़ा है। ध्यानी को हिरासत में तब लिया गया जब वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। कोर्ट ने पूछा, ‘क्या आप सरकार की छवि बचाने के लिए यहां हैं या लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए?’
क्या विरोध प्रदर्शन में शामिल होना संज्ञेय अपराध?
हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र मैथानी और सिद्धार्थ साह की डिवीजन बेंच ने कहा, ‘देश में कहीं भी आने-जाने का अधिकार हर किसी को है, उन्हें रोकने वाले आप कौन होते हैं? क्या विरोध प्रदर्शन में शामिल होना कोई संज्ञेय अपराध है? यह पुलिस की सरासर गुंडागर्दी है।’ हाई कोर्ट ने कहा, ‘यह अराजकता के बराबर है। हम एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत रह रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा या सरकार की छवि के नाम पर लोगों को परेशान न करें।’
नीट परीक्षा में खामियों के विरोध में प्रदर्शन
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वे राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक और परीक्षा-व्यवस्था की खामियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे। रविवार को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर रोके जाने के बाद यूपीपी के सचिव लाल मणि ने उन्हें हाई कोर्ट के सामने पेश करने की मांग करते हुए ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की। राज्य के वकील ने कोर्ट को बताया कि ध्यानी को हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे के भीतर ही रिहा कर दिया गया था।
दिल्ली में धारा 163, फिर उत्तराखंड में क्यों रोका गया?
हिरासत के कानूनी आधार के बारे में पूछे जाने पर सरकारी वकील ने सबसे पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला दिया। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को अशांति, सार्वजनिक उपद्रव या खतरे को रोकने के लिए तत्काल अस्थायी आदेश जारी करने का अधिकार है। जस्टिस मैथानी ने पूछा कि जब दिल्ली पुलिस ने धारा 163 का आदेश जारी किया था तो ध्यानी को उत्तराखंड में क्यों रोका गया। उन्होंने कहा कि किसी भी कथित उल्लंघन का मामला दिल्ली पुलिस का होगा।
हिरासत में लेने वाले को भी पक्ष बनाने का निर्देश
पुलिस की रोजाना की डायरी (डेली डायरी) की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। डायरी में लिखा था कि विरोध-प्रदर्शन में ध्यानी की भागीदारी से सरकार की छवि खराब हो सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रेलवे स्टेशन पर ध्यानी को हिरासत में लेने वाले अधिकारी को मामले में पक्ष बनाया जाए।