देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि देहरादून में रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं होने की स्थिति में वापस न भेजा जाए. दरअसल, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ देहरादून के बसंत विहार में वर्ष 2019 से दीर्घावधि वीजा पर रह रहे एक पाकिस्तानी सिख परिवार को सरकार की ओर से 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने के आदेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है, तो उन्हें भारत से नहीं निकाला जाए. उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को निर्देश लेने और हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की है.
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता मनजीत 2019 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से भारत आए थे. तब से यह परिवार देहरादून के वसंत विहार इलाके में दीर्घावधि वीजा पर रह रहा है. इस वीजा की अवधि बाद में बढ़ाई गई थी और यह दिसंबर 2026 तक वैध है.
यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब उत्तराखंड सरकार ने 31 मई को एक नोटिस जारी कर परिवार को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया. परिवार को 2 जून को नोटिस मिला और इसके बाद उन्होंने इस आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया. परिवार में तीन बच्चे हैं- जिनमें सबसे बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी ‘बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी’ की पढ़ाई कर रही है, और एक नाबालिग बेटा है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि परिवार को 2026 के आखिर में उनके वैध वीजा की अवधि खत्म होने तक भारत में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए.
कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार ने दलील दी कि परिवार अभी ऐसे इलाके में रह रहा है जहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का मुख्यालय है. सरकार ने यह भी कहा कि उस इलाके में उनके लगातार रहने से सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा हो सकती है, और उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि परिवार को पाकिस्तान वापस भेजा जाए. याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील विकास कुमार गुगलानी पेश हुए, जबकि केंद्र की ओर से वकील सौरव अधिकारी और राज्य सरकार की ओर से स्वाति वर्मा पेश हुईं.