Bihar Chunav: बिहार चुनाव के लिए आज पहले चरण के नामांकन का आखिरी दिन है. ऐसे वक्त में सीट शेयरिंग का खेल चल रहा है. महागठबंधन में कौन-कितनी सीट पर लड़ रहा है, अब तक यह पहेली नहीं सुलझी. बगैल सीट शेयरिंग का ऐलान किए ही राजद और कांग्रेस अपने-अपने कैंडिडेट को सिंबल बांट रहे हैं. इस बीच ऐसी पांच सीटें हैं, जिस पर महागठबंधन में पेच फंसा हुआ है. जी हां, बिहार की 5 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही. ये सभी सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और राजद दोनों की अपनी-अपनी दावेदारी है. इस टकराव से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं. चलिए जानते हैं उन पांचों सीटों को और क्यों फंस रहा है पेच.
वैशाली विधानसभा सीट: यह कांग्रेस की सीट रही है. पिछली बार यहां से कांग्रेस से संजीव सिंह चुनाव लड़े थे. इस बार यहां से राजद ने अजय कुशवाहा को भी उम्मीदवार बना रखा है.
लालगंज विधानसभा सीट: लालगंज भी कांग्रेस की सीट रही है. यहां से कांग्रेस आदित्य कुमार को उम्मीदवार बना रही है तो राजद बाहुबली नेता मुन्ना शुक्ला के परिवार से किसी को चुनाव लड़ना चाहती है. संभव है कि राजद मुन्ना शुक्ला की पत्नी अन्नु शुक्ला को टिकट दे.
जाले विधानसभा सीट: जाले सीट भी कांग्रेस की सीट रही है. कांग्रेस से अहमद उस्मानी चुनाव लड़े थे. इस बार कांग्रेस नौशाद को टिकट देना चाहती है. लेकिन यहां से भी राजद ऋषि मिश्रा को चुनाव लड़ाना चाहती है.
नरकटियागंज विधानसभा सीट: यह भी कांग्रेस की सीट रही है. यहां से विनय वर्मा चुनाव लड़े थे. अब राजद भी यहां से चुनाव लड़ना चाहती है. यही कारण है कि इस सीट पर भी पेच फंसा हुआ है.
वारसलीगंज विधानसभा सीट: यह भी कांग्रेस की सीट रही है. 2020 में कांग्रेस के सतीश सिंह लड़े थे.य हां से राजद अशोक महतो की पत्नी को चुनाव लड़ना चाहती है.
अब तक नहीं सामने आए सीटों के नंबर
गौरतलब है कि बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस और राजद ने अब तक सीट शेयरिंग फॉर्मूले का खुलासा नहीं किया है. जबकि दोनों पार्टियां अपने-अपने कैंडिडेट को सिंबल बांट रही हैं. आज क्योंकि नामांकन की आखिरी तारीख है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी. बहरहाल, बिहार में इस बार दो चरणों में वोटिंग है. पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर तो दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी. बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम 14 नवंबर को आएंगे.