क्या हिंदुत्व के एजेंडे पर ही बिहार चुनाव लड़ेगी BJP? इन बयानों से समझिये

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए नेताओं ने टिकट बंटवारे के बाद प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है. बीजेपी के कई दिग्गज नेता बिहार पहुंचे और नामांकन सभाओं में हिस्सा लिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विभिन्न भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में सभाओं को संबोधित किया. इन नेताओं ने हिंदुत्व के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिससे साफ है कि यह चुनाव में भाजपा का एक प्रमुख एजेंडा होगा.

बिहार चुनाव में भाजपा नेताओं के हिन्दुत्व एजेंडे पर वरिष्ठ पत्रकार कुमार राघवेंद्र कहते हैं कि बीजेपी और हिंदुत्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. बीजेपी ने तो हिंदुत्व के नाम पर ही अपनी राजनीति शुरू की थी. इसका फायदा भी पार्टी को मिला है. दो सांसदों से लेकर केंद्र सरकार बनाने तक का सफर इन्होंने तय किया है. एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में भाजपा की सरकार है,

बिहार में पहले भी निकाली जा चुकी है यात्रा: कुमार राघवेंद्र कहते हैं कि बिहार में बीजेपी ने पहले भी धार्मिक यात्रा निकाली थी, लालकृष्ण आडवाणी ने नेतृत्व किया था. जिस तरीके अयोध्य्या काशी मथुरा भाजपा के संकल्पपत्रों में रहा है. अब जिस तरीके से मां सीता का मंदिर बनवाया जा रहा है, बिहार में रामायण सर्किट सहित कई सर्किट बनवाया जा रहा है, इसका फायदा चुनाव में पार्टी जरूर लेगी.

सीतामढ़ी में माता सीता की मंदिर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव में एजेंडा सेट कर दिया है. बीजेपी एक बार फिर से हिंदुत्व के सहारे अपनी नैय्या पार लगाना चाहती है. सारण में अमित शाह ने कहा कि 500 साल तक भगवान श्रीराम झोपड़ी में विराजमान रहे. पीएम मोदी ने राम मंदिर का भूमिपूजन किया, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए और भव्य मंदिर का निर्माण कराया. अब बिहार के पुनौराधाम में भी माता सीता की वैसा ही भव्य मंदिर बनेगा.

विकास बनाम बुर्का का मुद्दा: योगी आदित्यनाथ 16 अक्टूबर को दानापुर से भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव और सहरसा से आलोक रंजन झा के नामांकन सभाओं में हिस्सा लिया. उन्होंने राजद और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल फर्जी वोटिंग के जरिए गरीबों और दलितों के हक को छीनना चाहते हैं. उन्होंने लालू यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपने परिवार का विकास किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 140 करोड़ लोगों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं. योगी ने ‘विकास बनाम बुर्का’ की बहस छेड़कर महागठबंधन को कठघरे में खड़ा किया.

छठ पूजा और आध्यात्मिक रंग: लखीसराय से बीजेपी उम्मीदवार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के नामांकन सभा में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर के जयकारे और छठ पूजा के उल्लेख के साथ की. रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का बिहार से गहरा लगाव है, जो उनके 11 साल में 58 बार बिहार दौरे से जाहिर होता है. इस सभा को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और जीतन राम मांझी ने भी संबोधित किया.

हिंदुत्व और मथुरा का नारा: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी दानापुर से रामकृपाल यादव, कुम्हरार से संजय गुप्ता और विक्रम से सिद्धार्थ सौरव के नामांकन सभाओं में हिस्सा लिया. उन्होंने अपने भाषण में हिंदुत्व को केंद्र में रखते हुए कहा कि अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी है. उन्होंने भगवान कृष्ण का जिक्र करते हुए मथुरा में ‘कन्हैया की मुस्कान’ की बात कही. रामकृपाल यादव पहली बार दानापुर से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उनका मुकाबला राजद के बाहुबली विधायक रीतलाल यादव से है. सिद्धार्थ सौरव पहले कांग्रेस के विधायक थे और अब भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं, जबकि संजय गुप्ता पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

अमित शाह ने सेट किया एजेंडा: अगस्त महीने में ही बिहार पहुंचे अमित शाह ने सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में माता सीता के मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी थी. तब उन्होंने कहा था कि जिस तरह अयोध्या की पहचान भगवान राम से होती है, उसी तरह सीतामढ़ी की पहचान माता सीता से होती है. ऐसे में माता सीता का मंदिर पूरे बिहार का मान बढ़ाएगा. इस बयान को बिहार विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा गया. एक बार फिर बीजेपी नेताओं ने जिस तरह से बयान दिए हैं ये साफ हो गया है कि पार्टी लोगों को हिंदुत्व के एजेंडे से जोड़ना चाहती है.