Farmer Burn Himself: जमीन विवाद को लेकर कर्नाटक के मांडया में एक शख्स ने खुद को आग के हवाले कर दिया, जिसमें उसकी मौत हो गई. मरने से पहले उसने आरोप लगाया कि जमीन विवाद को लेकर सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया. मंगलवार को मंजोगौड़ा नाम के किसान ने मांड्या जिला प्रशासन दफ्तर के बाहर खुद को आग के हवाले कर दिया. चश्मदीदों और पुलिस ने तेजी से आग बुझाने की कोशिश की और मांजेगौड़ा को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
राज्य सरकार पर लगाए आरोप
मांजेगौड़ा ने कहा कि उनका खेत जंगल से सटा हुआ है और राज्य वन विभाग विवादित भूखंड पर अपना मालिकाना हक जता रहा है. उन्हें खेती करने से रोक रहा है और मुआवजा भी नहीं दे रहा है. जिला प्रशासन के दफ्तर के सूत्रों के मुताबिक, 18 अक्टूबर को मांजेगौड़ा ने तहसीलदार को एक आवेदन दिया था, जिसमें लिखा था कि उन्होंने बैंक से लोन लिया है. किसान ने कहा था कि जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है और तीन स्थानीय लोगों ने उसका उत्पीड़न किया है.
लेकिन फिर भी सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया. मांजेगौड़ा ने इसके बाद जिला प्रशासन दफ्तर के बाहर ही खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली.किसान को तुरंत एमआइएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेंगलुरु रेफर किया गया. बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन ज्यादा जल जाने की वजह से वह जिंदगी की जंग हार गए.
ग्रामीण बोले- सुनी होती तो ये हादसा नहीं होता
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने उनकी समस्या समय पर सुनी होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है. मांड्या सेंट्रल पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वे अब यह जांच कर रहे हैं कि आखिर किसान को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किसने किया और जमीन विवाद में प्रशासन की भूमिका क्या रही. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसान परिवार को सहायता दी जाए.
मांड्या के डिप्टी कमिश्नर ने इस हादसे के बाद जांच के आदेश दे दिए हैं. वहीं कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहका कि उन्होंने इस मामले पर अधिकारियों से जांच रिपोर्ट मांगी है.