हरियाणा में अब नया मकान बनाना आसान, सरकार ने बिल्डिंग कोड में किया बदलाव, जानें सबकुछ

चंडीगढ़: हरियाणा में मकान बनाने से लेकर ऊंची कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी करने तक की प्रक्रिया अब सरल हो गई है। हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए बड़े बदलावों के बाद अब घर, दुकान, होटल, मॉल और फैक्टरी बनाने वालों को न तो महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही निरीक्षण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने अब पूरे सिस्टम को आसान करते हुए इसे दो श्रेणियों, कम जोखिम और उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग, में बांटा है।

एफएआर बढ़ाया गया
कम जोखिम वाले घरों और दुकानों का ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट अब आर्किटेक्ट खुद जारी कर सकेगा। जबकि बड़े प्रोजेक्ट का प्रमाणन थर्ड पार्टी तकनीकी विशेषज्ञ देंगे। इसके साथ ही एफएआर बढ़ाया गया है। पहली बार गरीब वर्ग के मकानों में बाथरूम और टॉयलेट का न्यूनतम आकार तय कर दिया गया है। यहां बता दें कि लंबे समय से आम नागरिक, डेवलपर्स और उद्योगपति शिकायत कर रहे थे कि कि बिल्डिंग परमिशन और ओसी लेने में महीनों लग जाते हैं। निरीक्षण प्रक्रिया धीमी और अपारदर्शी है। छोटे उद्योग और मकान निर्माण के मामले में सिस्टम जरूरत से ज्यादा जटिल है।

अब बिल्डिंग्स को दो श्रेणियों में रखा गया
नई प्रणाली में अब बिल्डिंग्स को दो श्रेणियों में रखा गया है ताकि अनुमोदन प्रक्रिया सरल और तेज हो। पहली श्रेणी में कम जोखिम वाली बिल्डिंग्स में छोटे और बड़े प्लॉटों पर बने आम मकान (16.5 मीटर तक ऊंचाई), दुकानें – एचसीएफ, एससीओ और डीएसएस शामिल होंगे। वहीं वे उद्योग भी इसी कैटेगरी में रहेंगे, जिनकी बिल्डिंग की ऊंचाई 30 मीटर तक होगी। इनका प्रमाणन आर्किटेक्ट द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेटेशन मोड में किया जाएगा। दूसरी श्रेणी में उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग शामिल रहेंगी। इनमें मल्टीप्लेक्स, ऊंची आवासीय इमारतें, डेटा सेंटर, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तथा होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं।