नई दिल्ली: आईआईटी खड़गपुर में वे छात्र जो बीटेक (ऑनर्स) डिग्री के लिए जरूरी 10 में से न्यूनतम 6 सीजीपीए (क्यूम्युलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज) हासिल नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें बीटेक पास की डिग्री दी जाएगी। लेकिन उन्हें ये बीटेक पास की डिग्री तभी दी जाएगी जब उनका सीजीपीए 5 या उससे अधिक होगा। वर्तमान नियम के मुताबिक 6 से कम सीजीपीए पाने वाले छात्रों को कोई डिग्री नहीं दी जाती है। आईआईटी संस्थान के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2027 में स्नातक होने वाले छात्र इस नए नियम का लाभ पाने वाला पहला बैच होंगे। आईआईटी खड़गपुर भारत के 23 आईआईटी में पहला संस्थान है जिसने बीटेक पास डिग्री शुरू करने का फैसला किया है।
अधिकारियों ने बताया कि छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय बुधवार को आईआईटी की सीनेट की बैठक में औपचारिक रूप से मंजूर किया गया। सीनेट के एक सदस्य ने कहा, ‘अब तक न्यूनतम 6 सीजीपीए हासिल न करने वाले छात्रों को कोई डिग्री नहीं दी जाती थी। नई व्यवस्था में जिन छात्रों का सीजीपीए 5 या उससे अधिक लेकिन 6 से कम होगा, उन्हें बीटेक पास डिग्री दी जाएगी, ताकि चार साल की उनकी मेहनत बेकार न जाए।’
किन छात्रों को माना जाएगा फेल
जिन छात्रों का सीजीपीए 5 से कम होगा, उन्हें फेल माना जाएगा। आईआईटी खड़गपुर के निदेशक सुमन चक्रवर्ती ने कहा, ‘बीटेक पास डिग्री लागू करने का मकसद छात्रों के मानसिक तनाव को कम करना था। जो छात्र पास हुए हैं, उन्हें डिग्री मिलनी चाहिए। इसलिए हमने बीटेक पास डिग्री देने का फैसला किया है। केवल 6 सीजीपीए पाने तक उन्हें रोकना उचित नहीं है क्योंकि इससे तनाव और चिंता बढ़ती है। हालांकि यदि छात्र अपने अंक सुधारना चाहते हैं, अतिरिक्त कोर्स करना चाहते हैं और दोबारा परीक्षा देना चाहते हैं, तो हम उन्हें पूरा प्रोत्साहन देंगे।’
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक संस्थान के शिक्षकों ने बताया कि कई छात्र विभिन्न कारणों से ऐसे विषय चुन लेते हैं जिनमें उनकी रुचि नहीं होती और ऐसे में वे आवश्यक सीजीपीए हासिल करने में कठिनाई महसूस करते हैं। एक प्रोफेसर ने कहा, ‘अपनी क्लास के साथ वालों को ऑनर्स डिग्री के साथ स्नातक होते देखना और खुद डिग्री से वंचित रह जाना भारी मानसिक तनाव पैदा करता है। यह कदम 6 से कम सीजीपीए वाले छात्रों को आईआईटी से डिग्री पाने में मदद करेगा। इसके बाद वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ सकते हैं और एक अच्छी नौकरी हासिल कर सकते हैं।’
दोबारा परीक्षा देकर अधिक लाना बेहद मुश्किल
एक अन्य शिक्षक ने कहा कि 5 या उससे थोड़ा अधिक सीजीपीए वाले छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा देकर 6 या उससे अधिक अंक लाना बेहद कठिन होता है। उन्होंने कहा, ‘जिस छात्र का सीजीपीए 5.8 है, उसके पास दोबारा परीक्षा देने पर 6 तक पहुंचने का मौका रहता है।’ छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
एक छात्र ने कहा, ‘ऑनर्स डिग्री के लिए आवश्यक सीजीपीए हासिल करने में संघर्ष कर रहे छात्रों को इससे निश्चित रूप से राहत मिलेगी।’