ग्रेटर नोएडा: यूपी में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक कार हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और रेस्क्यू सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे में जान गंवाने वाले युवक के पिता का कहना है कि यदि समय रहते सही संसाधनों के साथ रेस्क्यू किया जाता, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासन और संबंधित विभागों की घोर लापरवाही बताया है. मृतक के पिता के अनुसार, घटना रात करीब 12 बजे की है, जब उनके बेटे ने फोन कर बताया कि उसकी कार सड़क से फिसलकर नाले में गिर गई है और वह अंदर फंसा हुआ है. पिता ने बताया कि गाड़ी धीरे-धीरे डूब रही थी इसलिए मेरा बेटा कार की छत पर लेट गया था.
सूचना मिलते ही पिता तुरंत मौके की ओर रवाना हो गए, लेकिन अंधेरा और स्पष्ट संकेत न होने के कारण यह पता लगाने में 30 से 40 मिनट लग गए कि युवक किस नाले में फंसा है. इस दौरान पिता और बेटे के बीच लगातार मोबाइल फोन पर बातचीत होती रही. पिता ने बताया कि बेटा कार से निकलकर उसकी छत पर लेटा हुआ था ताकि संतुलन बना रहे. वह लगातार कह रहा था कि गाड़ी धीरे-धीरे पानी में डूब रही है और उसे तुरंत बचाने की जरूरत है. लगभग दो घंटे तक युवक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा. अपनी लोकेशन बताने के लिए उसने मोबाइल की टॉर्च ऑन कर रखी थी, जिससे दूर से हल्की रोशनी दिखाई दे रही थी.
रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर पिता ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची सरकारी रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे. उनके अनुसार, टीम केवल रस्सी के सहारे रेस्क्यू की कोशिश करती रही, लेकिन वह सही जगह तक नहीं पहुंच सकी. उन्होंने कहा कि अगर एक तरीका काम नहीं कर रहा था तो नाव, तैराक या अन्य वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
पिता ने यह भी बताया कि इस स्थान पर पहले भी इसी तरह के हादसे हो चुके हैं. कुछ सप्ताह पहले एक ट्रक भी इसी नाले में फंसा था, जिसके चालक को किसी बाहरी व्यक्ति ने मुश्किल से बचाया था. इसके बावजूद प्रशासन ने न तो बैरियर लगाए, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी संकेत. घने कोहरे के कारण सड़क का अंदाजा नहीं लग पाया और कार सीधे नाले में गिर गई.
घटना के बाद 112 नंबर पर कॉल करने पर करीब 22 मिनट बाद पुलिस और क्रेन मौके पर पहुंची. उस समय भी बेटे से संपर्क बना हुआ था और वह आवाज का जवाब दे रहा था. बाद में फायर ब्रिगेड को बुलाया गया, लेकिन उनके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे. शाम करीब 6 बजे एसडीआरएफ ने पूरी तैयारी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी और ऑपरेशन केवल शव बरामदगी तक सीमित रह गया. पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पिता ने कहा कि वे यह लड़ाई इसलिए लड़ रहे हैं ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े.