Iran Lavan Refinery: अमेरिका के साथ सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद ईरान की लावन रिफाइनरी और सिरी द्वीप पर बुधवार को जोरदार धमाके हुए. धमाकों के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. मेहर न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी है. एजेंसी के मुताबिक, बुधवार सुबह जैसे ही सीजफायर हुआ, लावन द्वीप रिफाइनरी जोरदार धमाकों से दहल उठी. फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि यह ब्लास्ट कितने विनाशक थे और किस वजह से ब्लास्ट हुआ.
लावन द्वीप पर जोरदार धमाके
मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि लावन द्वीप के अलावा सिरी आइलैंड पर भी धमाका हुआ. मेहर ने ईरान की आर्म्ड फोर्सेज का हवाला देते हुए कहा,’सभी पार्टियों को घोषित सीजफायर का पालन करने की जरूरत को देखते हुए, और आर्म्ड फोर्सेज की घोषणा के आधार पर, देश के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा.’ दोनों जगहों पर धमाकों का सोर्स अभी कन्फर्म नहीं हुआ है. किसी ने अब तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
दूसरी ओर, सीजफायर के तत्काल राहत को मिली है लेकिन एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि तबाह हुआ एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और जारी भू-राजनीतिक जोखिम तेल की कीमतों को हाई बनाए रख सकते हैं. निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या यह सीजफायर किसी बड़े और स्थिर समाधान में बदल पाता है या नहीं. तभी वह कोई बड़ा दांव लगाएंगे. इस अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें 2.4% बढ़कर $4,814 प्रति औंस हो गई हैं.
इराक ने खोल दिया एयरस्पेस
वहीं सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, इराक ने अपना एयरस्पेस फिर से खोल दिया है. यह अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद, सामान्य स्थिति की ओर धीरे-धीरे लौटने का संकेत है. उम्मीद है कि इस कदम से क्षेत्रीय विमानन में आई उन रुकावटों में कमी आएगी, जो जंग के दौरान काफी बढ़ गई थीं. पूरे क्षेत्र में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ानों को दूसरे रास्तों से भेजना पड़ा था और उनमें देरी हुई थी. इराक का यह फ़ैसला, मौजूदा अनिश्चितताओं के बावजूद, अस्थायी रूप से तनाव कम होने को लेकर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
दो हफ्ते के लिए हो गया सीजफायर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ दो हफ्ते के लिए युद्धविराम की घोषणा की. उन्होंने कहा कि तेहरान ने बातचीत के लिए 10-बिंदुओं वाला एक कारगर प्रस्ताव पेश किया है. यह घोषणा उस डेडलाइन के खत्म होने से दो घंटे से भी कम समय पहले की गई, जिसे ट्रंप ने ईरान के लिए बार-बार बढ़ाया था. इस समय-सीमा के तहत ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना था और किसी समझौते को स्वीकार करना था, वरना उसे पूरी सभ्यता के विनाश का सामना करना पड़ता.