मुजफ्फरनगर. मुजफ्फरनगर जनपद में लाखों की रिश्वत लेने के आरोप में तितावी थाने के थानाध्यक्ष और 2 सिपाहियों पर गाज गिरी है. तकरीबन 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसएसपी मुजफ्फरनगर ने जांच कराकर तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.
मामला तितावी थाने से जुड़ा है, जहां मार्च महीने में पुलिस ने 270 ग्राम स्मैक बरामद करते हुए 2 लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि 2 आरोपी फरार बताए जा रहे थे. आरोप है कि फरार दोनों आरोपियों के नाम निकालने और मामले में राहत देने के लिए तितावी थानाध्यक्ष पवन चौधरी, सिपाही अनीस और सिपाही नवीन ने 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.
फरार आरोपियों में से एक की गिरफ्तारी के बाद रिश्वत देने वाली महिला संजीदा सामने आई. संजीदा ने पुलिसकर्मियों के साथ हुई फोन पर बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिसमें सिपाही नवीन उससे बातचीत करता हुआ सुना जा सकता है. इसके बाद संजीदा ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि 3 लाख की मांग के बदले वह 2,85,000 रुपये पुलिसकर्मियों को दे चुकी है. अब वह कथित तौर पर दिए गए रिश्वत के पैसे वापस दिलाने की मांग कर रही है.
जांच में आरोप सही मिले
ऑडियो और वीडियो वायरल होते ही मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने मामले का संज्ञान लिया. एसएसपी ने पहले सीओ से प्राथमिक जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया थानाध्यक्ष पवन चौधरी और दोनों सिपाही अनीस व नवीन की संलिप्तता पाई गई. इसके बाद एसएसपी ने तुरंत प्रभाव से तीनों को निलंबित कर दिया और मामले की विस्तृत जांच एसपी देहात को सौंप दी. घटना के संबंध में जानकारी देते हुए एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने कहा कि मार्च महीने में 270 ग्राम स्मैक बरामद होने का मामला ऑपरेशन सवेरा के तहत दर्ज हुआ था, जिसमें 2 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए थे और 2 वांछित थे. इस प्रकरण में लगी पुलिस टीम से जुड़े एक ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद उसमें कुछ गंभीर और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए.
एसएसपी वर्मा ने बताया कि सीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत थानाध्यक्ष और दोनों सिपाहियों की ईमानदारी (इंटीग्रिटी) संदिग्ध प्रतीत हुई, जिस पर तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर गंभीर विभागीय जांच एसपी देहात को सौंप दी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की ‘जीरो टॉलरेंस एंटी करप्शन’ नीति के तहत ही यह कार्रवाई की गई है और विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है.