22 मई से यूपी में जनगणना: कार-जीप गिनेंगे, लेकिन ट्रैक्टर, ई-रिक्शा नहीं

लखनऊ: डेढ़ दशक बाद होने जा रही जनगणना का पहला चरण यानी हाउस सर्वे 22 मई से उत्‍तर प्रदेश में शुरू होगा। इससे पहले 7 मई से स्वणगना यानी खुद ही ऑनलाइन सारा विवरण भरने का विकल्प मिलेगा। इस दौरान 33 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें वाहन भी शामिल है। सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों की इस गिनती में कार, जीप और वैन तो शामिल है लेकिन ट्रैक्टर, ई-रिक्शा जैसे वाहन इस कॉलम में नहीं भरे जाएंगे।

जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से प्रदेशभर में सुपरवाइजर, प्रगणक एवं अन्य स्टॉकहोल्डर्स का प्रशिक्षण करवाया जा रहा है। इस दौरान अहम फोकस हाउस सर्वे में पूछे जाने वाले 33 सवालों A yo पर है। प्रगणकों को यह भी बताया जा रहा है कि क्या जानकारी नहीं भरनी है? मसलन सवाल नंबर 31 में कार, जीप, वैन आदि वाहनों की जानकारी जुटाई जानी है। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि ट्रैक्टर, ई-रिक्शा, ऑटो जैसे वाहनों की इसमें गणना नहीं होगी। विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान ध्यान सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों की गिनती पर होता है। ट्रैक्टर कृषि कार्य का आवश्यक अंग है, यह सुविधा या ऐसेट नहीं है।

किराए पर हैं तो कहीं और घर है क्या?
2011 की जनगणना के दौरान आम तौर पर यह पूछा जाता था कि आप जिस घर में रह रहे हैं वह किराए का है, अपना है या किसी अन्य माध्यम से यहां रह रहे हैं? इस पर यह भी जानकारी जुटाई जाएगी कि अगर आपका किराए पर रह रहे हैं ते कहीं आपका अपना आवास भी है क्या? इस सवाल का विस्तार करने की वजह आवास की आवश्यक आवश्यकताओं का आकलन करना है जिसके आधार पर आवासीय योजनाओं की आगे दिशा तय
होगी। फरवरी में होने वाली जनगणना में यूं तो हर निवासी की जाति गिनी जाएगी, लेकिन, हाउस सर्वे के दौरान भी परिवार का मुखिया एससी/एसटी या अन्य जाति का है इसका विवरण जुटाएगा। इसमें एससी और एसटी के लिए अलग कालम होगा, बाकी की गिनती अन्य में होगी। यह भी बताया जा रहा है कि एससी में केवल हिंदू, सिख एवं बौद्ध धर्म के अनुयायी शामिल होंगे, एसटी में अन्य की भी गणना हो सकती है।

जनगणना ड्यूटी ने उड़ाई शिक्षा विभाग की नींद
नगणना ड्यूटी ने शिक्षा विभाग की मुश्किले बढ़ा दी है। शिक्षकों के बाद अब अधिकारी भी चिंतित है, क्योंकि कई जगह सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगने से स्कूल बंद होने जैसी स्थिति बन गई है है। जनगणना का पहला चरण 22 मई से शुरू होना है और उससे पहले जिलों में प्रशिक्षण चल रहा है। इसी दौरान स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण 1 मई से शुरू हो गया है, जिसमे आउट ऑफ स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर नामाकन कराना प्रमुख लक्ष्य है। लेकिन जब स्कूलों के शिक्षक ही जनगणना कार्य में चले जाएगे तो न पढ़ाई हो पाएगी, न अभियान के लिए स्टाफ बचेगा, और एमडीएम जैसी योजनाएं भी प्रभावित होगी।

कई जिलों के बीएसए ने लिखी चिट्ठी
इसी कारण कई जिलों के बीएसए ने डीएम को पत्र लिखकर समाधान की मांग की है। फर्रुखाबाद के बीएसए विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों से सूचना मिली है कि कई विद्यालयों के सभी शिक्षक मकान गणना में लगाए गए है, जिससे विद्यालय बंद हो रहे है। उन्होंने प्रधानाध्यापक और इंचार्ज अध्यापक को ड्यूटी से मुक्त रखने की अपील की। बरेली की बीएसए विनीता ने भी कहा कि सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगने से पढाई, एमडीएम और नए दाखिले रुक जाएंगे, इसलिए हेडमास्टर और इंचार्ज को मुक्त रखा जाए। उन्नाव के बीएसए शैलेश कुमार पाडेय ने साथ ही यह भी आग्रह किया कि शिक्षकों की ड्यूटी स्कूल के नजदीकी क्षेत्र में ही लगाई जाए, न्याय पंचायत से बाहर न भेजा जाए।

जनता को समझाने पर जोर क्‍यों?
पिछली जनगणनाओं के अनुभव को देखते हुए प्रशिक्षण में संवाद बेहतर करने एवं जनता को समझा कर जानकारी प्राप्त करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सवालों की प्रकृति को देखते हुए बहुत बार लोग जानकारी देने से मना कर करते है, इस स्थिति का सामना कैसे करना है इसके लिए लाइव डेमो भी करवाया जा रहा है। उत्तरदाताओं को आश्वस्त किया जाएगा कि इस जानकारी का उपयोग केवल आंकड़े जुटाने के लिए ही किया जा रहा है न कि किसी अन्य प्रयोजन के लिए।