जयपुर: राजस्थान में बढ़ते तापमान के साथ पंचायत चुनाव की सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है। पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 31 जुलाई तक सभी ग्राम और शहरी स्तर के चुनाव संपन्न करवाए। इससे पहले राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव कराने की अंतिम तिथि 15 अप्रैल थी। लेकिन कोर्ट में पेश होकर सरकार ने इसे बढ़ाने की अर्जी लगाई और अब नई तारीख के रूप में सरकार को अदालत ने जुलाई तक को मियाद दी हैं।
आखिर बीजेपी सरकार क्यों कर रही पंचायत चुनाव में देरी
राजस्थान में पंचायत चुनाव निर्धारित समय से लगभग डेढ़ महीने से ज्यादा लेट हो चुका है। कई ग्राम पंचायतों और निकायों में पूर्व प्रशासन या कहे सरकार का कार्यकाल तक पूरा हो चुका है। लेकिन फिर ही प्रदेश की बागडोर संभाल रही बीजेपी सरकार ने चुनाव कराने को लेकर अभी अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की है। अंदरखाने क्या चल रहा है, ये तो बीजेपी संगठन या सीएम भजनलाल ही स्पष्ट कर सकते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से सरकार की चल रही कुछ गतिविधियां ये बता रहे हैं कि अब सरकार पूरी मजबूती के साथ पंचायत और निकाय चुनाव के लिए मैदान में उतर सकती है।
31 जुलाई की क्यों मानी जा रही अब अंतिम तिथि
उल्लेखनीय है कि अब ये माना जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव के लिए हाईकोर्ट की ओर से दी गई 31 जुलाई की तारीख आखिरी माना जा रही है। निर्वाचन आयोग पहले ही कह चुका है कि उनकी तरफ से तैयारी पूरी है। वहीं परिसीमन का का भी लगभग पूरा हो चुका है। वहीं चुनावी रणनीति के तौर पर भी सत्ताधारी संगठन की बढ़ती गतिविधियां भी इस बात का संकेत दे रही है कि जुलाई तक राजस्थान में पंचायत चुनाव संपन्न हो जाएंगे। हालांकि बता दें कि सरकार की ओर से हाईकोर्ट में यह याचिका लगाई गई थी चुनाव दिंसबर तक करवाने की इजाजत मांगी गई थी। कोर्ट की ओर से सरकारों की दलीलें खारिज कर दी गई। अदालत की अवमानना और लगातार विपक्ष की घेराबंदी जैसे सभी बिंदुओं को देखते हुए यह माना जा रहा है कि प्रदेश में जुलाई तक चुनाव हो जाएंगे।
‘गांव चौपाल’ के जरिए भी जुड़ रही है सरकार
बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मई में ‘ग्राम विकास चौपाल’ और ‘रात्रि विश्राम’ अभियान की शुरुआत की है, जिसमें वे खुद अब तक चार जिले प्रतापगढ़, अजमेर (पुष्कर), बांसवाडा और डूंगरपुर में गांव और ग्राम पंचायतों में सीधे ग्रामीणों से रूबरू हो चुके हैं। हालांकि इस कार्यक्रम को सरकार के जनता से जुड़ाव के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन राजनीति के जानकार इसे पंचायत चुनाव की तैयारी से भी जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश सरकार के मंत्री और बीजेपी संगठन के नेता भी गांव में जाकर सरकार की योजना नीति समझने के साथ ग्रामीणों से संवाद बढ़ा रहे हैं। इससे पहले भी फरवरी 2026 में भी जयपुर में संरपंच के सम्मेलन को भी पंचायत चुनाव जीत की रणनीति से जोड़ा जा रहा था।