शिमला के जंगलों में भड़की भीषण आग, रिहायशी इलाकों तक पहुंचीं लपटें,

शिमला: हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी अब जंगलों पर भारी पड़ने लगी है. राजधानी शिमला के टुटीकंडी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी. देखते ही देखते आग ने जंगल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और इसकी लपटें आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगीं. आग फैलने से क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया. लोगों को अपने घरों और संपत्ति की चिंता सताने लगी.

तेजी से फैली आग, मची अफरा-तफरी
स्थानीय लोगों ने सुबह जंगल से आग की तेज लपटें और धुआं उठता देख तुरंत अग्निशमन विभाग को सूचना दी. आग लगातार फैलती जा रही थी और सूखी घास व पेड़ों के कारण स्थिति और गंभीर हो गई. कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और आग की स्थिति पर नजर बनाए रखी. स्थानीय लोगों ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में रिहायशी इलाकों के पास जंगलों में आग लगना लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनता जा रहा है.

ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू
सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया. अग्निशमन अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. करीब ढाई घंटे की लगातार कोशिशों के बाद आग को नियंत्रित किया गया. उन्होंने बताया कि स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त कर्मचारियों और टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि आग दोबारा न भड़के। विभाग लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहा है. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि जंगलों के आसपास किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और आग जैसी घटना की सूचना तुरंत प्रशासन को दें.

गर्मी और सूखा मौसम बन रहे बड़ी वजह
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता तापमान, सूखा मौसम और मानवीय लापरवाही जंगलों में आग लगने की बड़ी वजह बन रही है. जंगलों में लगने वाली आग से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है, बल्कि वन्य जीवों और पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ता है. बीते दिनों सोलन जिले के कसौली क्षेत्र के जंगलों में भी भीषण आग लगी थी. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि सेना और वायुसेना की मदद लेनी पड़ी थी. हेलीकॉप्टरों के जरिए आग बुझाने का अभियान चलाया गया था. अब टुटीकंडी में लगी आग ने फिर से जंगलों की सुरक्षा और आग से बचाव के इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.