हरियाणा में रिटायरमेंट के बाद नौकरी कर रहे कर्मचारियों पर गिरी गाज, 6 अधिकारियों को दिखाया गया बाहर का रास्ता

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने रिटायरमेंट के बाद भी बरसों से सचिवालय में जमे छह अधिकारियों व कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद शुक्रवार को ऐसे सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा तलब कर लिया है। रिटायरमेंट के बाद मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों के कार्यालयों में जुगाड़ से नौकरियां कर रहे इन अधिकारियों व कर्मचारियों की वजह से न तो नये लोगों को आगे आने का मौका मिल रहा है और न ही बिना जोड़तोड़ के लोगों के काम हो रहे हैं।

हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को सेवानिवृत्ति (सुपरएनुएशन) के बाद दोबारा नियुक्त किए गए तथा संविदा आधार पर कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर यह कार्यवाही की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के कार्यालय ने हरियाणा सिविल सचिवालय के सभी विभागों को पत्र जारी कर 15 जून तक समस्त जानकारी उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।

बृहस्पतिवार को जिन अधिकारियों व कर्मचारियों को सेवाओं से अलग किया गया है, उनमें सज्जन सिंह, विपिन कुमार, हरीश चंद्र, हरेंद्रपाल, तरसेम सिंह और मुन्नी लाल सैनी शामिल हैं। मुख्य सचिव कार्यालय ने हरियाणा सचिवालय में कार्यरत सभी श्रेणियों (ए, बी, सी और डी) के उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्त किया गया है या जो संविदा आधार पर सेवाएं दे रहे हैं।

यह जानकारी विभिन्न विभागों से एकत्र कर मुख्य सचिव कार्यालय की स्थापना-2 शाखा को भेजनी होगी। रिटायरमेंट के बाद काम कर रहे अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या सेक्टर 17 स्थित मिनी सचिवालय में भी कम नहीं है।

मुख्य सचिव कार्यालय के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री के आदेशों के अनुपालन में यह विवरण तैयार किया जा रहा है। सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, विशेष सचिवों, संयुक्त सचिवों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीन कार्यरत ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा रिकार्ड निर्धारित समय सीमा तक उपलब्ध कराएं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस कवायद को सचिवालय और विभिन्न विभागों में सेवानिवृत्ति के बाद दी गई नियुक्तियों की व्यापक समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार यह जानना चाहती है कि वर्तमान में कितने अधिकारी और कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी तंत्र में कार्यरत हैं तथा उनकी नियुक्तियों की स्थिति क्या है।

पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। इस आदेश के बाद सचिवालय और विभिन्न विभागों में पुनर्नियुक्त एवं संविदा कर्मचारियों का डेटा जुटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रशासनिक हलकों में इसे सरकार की जवाबदेही और मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।