पश्चिम एशिया अब भी युद्ध की आग में जल रहा है. ईरान जंग के चलते होर्मुज में टेंशन ही टेंशन है. होर्मुज में जहाजों पर खतरा मंडरा रहा है. भारतीय नाविकों वाले जहाज पर अटैक इसका उदाहरण है. बीते दिनों ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले तेल टैंक पर अमेरिका ने अटैक किया. अमेरिकी नौसेना के अटैक में तीन भाररतीय नाविकों की मौत हो गई. इस घटना से भारत गुस्से में है. भारत ने अमेरिका को न केवल सुनाया है, बल्कि कड़ा विरोध जताया है. भारत ने आंख दिखाते हुए अमेरिका को कह दिया है कि समंदर में जहाजों पर हमला और भारतीयों पर अटैक किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं है. अब उससे एक कदम आगे बढ़कर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो को ही खरी-खरी सुना दिया है.
जी हां, ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविक वाले तेल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है. इस मुद्दे को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फोन करके शनिवार तड़के मार्को रुबियो साफ-साफ कड़े लहजे में कह दिया कि समंदर में कमर्शियल जहाजों पर ऐसे घातक हमले कहीं से भी न्यायसंगत नहीं हैं.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीन भारतीय नाविकों की मौत का मामला अमेरिका के सामने उठाया. उन्होंने मार्को रुबियो का नाम लेकर एक्स पर लिखा, ‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की. खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई. वाणिज्यिक जहाजों पर ऐसे घातक हमले न्यायसंगत नहीं हैं.’ इन घटनाओं को अस्वीकार्य बताते हुए जयशंकर ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग को ऐसी कार्रवाई का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए.
कल हुआ था मौत कन्फर्म
दरअसल, यह भारत की ओर से एस जयशंकर ने कड़ा विरोध तब जताया, जब भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले के बाद लापता बताए गए तीन चालक दल के सदस्य मृत पाए गए हैं. शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कन्फर्म किया था. उन्होंने इन मौतों को ‘दुखद’ क्षति बताया और कहा कि लापता नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं और उनकी पहचान कर ली गई है. मृतकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरासिया और चीफ इंजीनियर पट्नाला सुरेश के रूप में हुई है.
अमेरिका हमलों में मरने वाले तीनों भारतीय कौन?
आदित्य शर्मा
शिवानंद चौरसिया
पट्नाला सुरेश
किस जहाज पर हुआ अटैक?
दरअसल, ओमान की खाड़ी में अमेरिका ने जिस जहाज पर अटैक किया, वह पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर था. पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर सेट्टेबेलो पर हमले के वक्त 28 सदस्यीय दल था. इसमें 24 भारतीय और 4 विदेशी नागरिक- दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी शामिल थे. घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को बचा लिया गया, जबकि लापता सदस्यों की तलाश जारी रही और बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई.
अमेरिका ने कहा- टैंकर ने नाकेबंदी का उल्लंघन किया
वहीं, इस मामले में अमेरिकी सेना ने टैंकर पर हमले की बात स्वीकार की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने टैंकर को निशाना बनाया क्योंकि उसने अमेरिकी नौसैनिक कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश कर रहा था, जो अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन था. सेंट्रल कमांड के बयान में कहा गया कि उसकी एक विमान ने ओमान की खाड़ी में जहाज पर हमला किया, क्योंकि चालक दल ने बार-बार अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया. यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते विभिन्न समुद्री प्रतिबंधों के कारण वाणिज्यिक शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है.
भारत ने वाणिज्यिक जहाज पर हमले की निंदा की
भारत ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि जहाज पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक सवार थे और वह वाणिज्यिक गतिविधि में लगा था. विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमले बेहद चिंताजनक हैं और यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े हुए हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘क्षेत्र में शिपिंग पर हमले बेहद चिंताजनक हैं और क्षेत्र में जारी संघर्ष का सीधा परिणाम हैं. हम तत्काल तनाव कम करने की अपील दोहराते हैं.’