संसद में अपना संख्या बल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत से नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं. टीएमसी के बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने का दावा किया है और ये सभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने को तैयार हैं. अगर यह दावा सही साबित होता है तो संसद में NDA की ताकत बढ़ेगी और उसके लिए कई महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है.
दरअसल, पिछले संसद सत्र में एनडीए को संविधान संशोधन से जुड़े कुछ अहम विधेयकों पर बहुमत नहीं मिलने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. ऐसे में गठबंधन अब विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की संभावनाएं तलाश रहा है. सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर भी नजरें टिक गई हैं.
उद्धव सेना में टूट की अटकलें तेज
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा जोरों पर है कि महाराष्ट्र में महायुति की विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी में असंतोष गहराता जा रहा है. अब यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि पार्टी के कुछ सांसद अलग राह चुन सकते हैं. लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं और दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को किसी अन्य दल में विलय करना होगा.
टीओआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर ऐसा कोई कदम उठता है तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है. माना जा रहा है कि शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्यभर में अपना संगठनात्मक आधार मजबूत किया है और कई स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है. वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से मुंबई और कुछ शहरी इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है.
‘विचारधारा बदलने का खामियाजा भुगत रहे उद्धव’
शिवसेना (यूबीटी) गुट के सांसदों के एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों पर बीजेपी नेता राम कदम ने बड़ा बयान दिया है. ANI से बातचीत में कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे विचारधारा बदलने का खामियाजा पहले ही भुगत चुके हैं और आगे भी भुगतेंगे. उन्होंने कहा कि उनके सभी नेता निश्चित रूप से उन्हें छोड़ देंगे. राम कदम ने कहा, ‘जिस तरह ममता बनर्जी ने अपनी विचारधारा बदली और उसका असर उद्धव ठाकरे पर भी पड़ा और उन्होंने भी अपनी विचारधारा बदल ली, तो विचारधारा बदलने का नुकसान उद्धव ठाकरे पहले भी झेल चुके हैं और भविष्य में भी झेलेंगे. उनके सभी नेता उन्हें छोड़ देंगे, यह तय है.’
360 के आंकड़े पर NDA की नजर
सूत्रों के मुताबिक, संसद में एनडीए की आगे की रणनीति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के कितना करीब पहुंच पाता है. वर्तमान में 540 सदस्यीय लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं और किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है. टीएमसी में संभावित टूट और विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के समर्थन की संभावनाओं ने एनडीए को उम्मीद दी है कि वह भविष्य में अपने संख्या बल को और मजबूत कर सकता है.