ईरान ने सरेआम शहबाज के दावों को बताया झूठा, फर्जी निकली 24 घंटे में डील होने वाली बात

West Asia War: पश्चिम एशिया संघर्ष का अबतक कोई समाधान नहीं निकला है. एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान पर समझौते को लेकर दबाव बना रहे हैं, तो वहीं ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. इसके चलते अबतक शांतिवार्ता की कोई संभावना नजर नहीं आई है. हालांकि, अब पहले से ही दोनों देशों के बीच असफल शांति वार्ता का क्रेडिट ले चुके पाकिस्तान की एक टिप्पणी आई है, जिसमें उसने 24 घंटों के अंदर ईरान- अमेरिका का शांति समझौता होने की बात कही थी. इस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है.

मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने शनिवार ( 13 जून 2026) को कहा कि अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया जंग को समाप्त करने के लिए 24 घंटों के अंदर एक समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं, क्योंकि दोनों पक्षों ने समझौते को पूरा करने की संभावनाओं के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया है. हालांकि, ईरान ने शहबाज शरीफ की इस घोषणा पर संदेह जताया है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि रविवार ( 14 जून 2026) को तथाकथित इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर नहीं होंगे. बघाई ने कहा कि आने वाले दिनों में मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने सटीक तारीखों को लेकर अटकलें लगाने के मामले में सावधानी बरतने का आग्रह किया.

पाकिस्तान का ऐलान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा,’ हम शांति समझौते के पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं. अगले 24 घंटों में इसके फाइनल होने की उम्मीद है, जिसके तुरंत बाद पाकिस्तान शांति समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहा है और उसके बाद अगले हफ्ते तकनीकी स्तर की बातचीत होगी.’

उन्होंने आगे कहा,’ हम बातचीत के दौरान लगातार प्रतिबद्धता दिखाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का धन्यवाद करना चाहते हैं और इस क्षेत्र में अपने भाइयों के समर्थन के लिए हम उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं. हमें भरोसा है कि यह ऐतिहासिक शांति समझौता स्थायी शांति के लिए एक मजबूत आधार बनेगा.’ उन्होंने इस पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ, अमेरिकी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को टैग किया.

अराघची का पोस्ट
बता दें कि शुक्रवार ( 12 जून 2026) को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने अपने ‘X’हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा,’ इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने में अब पहले से कहीं अधिक करीब है. इसके अंतिम रूप दिए जाने तक मीडिया को इसके बारे में अटकलें लगाने से बचना चाहिए.’

उन्होंने आगे लिखा,’ हमारी जिम्मेदार और पारदर्शी नीति के मुताबिक, सभी डीटेल्स समय आने पर जनता के साथ शेयर किए जाएंगे.’

समझौते के मुद्दे
इस्माइल बघाई ने इस अनिश्चितता का कारण दूसरी तरफ की हिचकिचाहट को बताते हुए संकेत दिया कि प्रस्तावित समझौते के कुछ पहलू अभी भी अनसुलझे हैं. अमेरिकी प्रशासन के एक सीनियर ऑफिसर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच समझौते में सबसे पहले दुश्मनी को खत्म करना और होर्मुज स्ट्रेट को वापस खोलना होगा. इसके बाद अन्य विवादित मुद्दों पर बात होगी.

अधिकारी ने कहा कि हस्ताक्षर के बाद के 60 दिनों का इस्तेमाल ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत करने के लिए किया जाएगा, जिसमें तेहरान के यूरेनियम के भंडार को हटाना या नष्ट करना शामिल है. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया कि बातचीत के अगले चरण में परमाणु मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो टाइम लिमिट बढ़ाई जा सकती है.

कब होगा समझौता?
बता दें कि अमेरिका-ईरान लंबे समय से समझौते को लेकर अटके हुए हैं. ईरान यूरेनियम संवर्धन करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखने के अपने अधिकार पर लगातार जो रहा है, जो वॉशिंगटन की लंबे समय से चली आ रही ‘रेड लाइन’ के बिल्कुल विपरीत है. अमेरिका की मांग है कि ईरान इन दोनों ही चीजों से पीछे हटे. वहीं शनिवार ( 13 जून 2026) को होर्मुज स्ट्रेट पर फिर झड़प शुरू हुई, जिसमें अमेरिका ने बताया कि उसने कमर्शियल जहाजों को टारगेट करने वाले कई ईरानी ड्रोन को मार गिराया है. अराघची ने भी ईरानी सरकारी मीडिया से कहा कि, जब तक सभी मुद्दों पर पूरी तरह समझौता नहीं हो जाता, तब तक निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि कोई सहमति बन गई है.’