तेहरान: पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच अब दुनिया की नजर रविवार पर टिक गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर आज यानी रविवार को हस्ताक्षर होंगे. ट्रंप का कहना है कि जैसे ही समझौता साइन होगा, दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोल दिया जाएगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘समझौते पर कल हस्ताक्षर होने वाले हैं और इसके तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खोल दिया जाएगा. ईरान के साथ हमारे रिश्ते अब पहले की सरकारों की तुलना में कहीं बेहतर हैं.’
ट्रंप बोले- यूरेनियम भी उठा लेंगे
ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में दफन परमाणु सामग्री को भी अपने कब्जे में लेकर नष्ट करेगा. उन्होंने लिखा, ‘जब हालात पूरी तरह शांत हो जाएंगे, तब हम गहराई में दबे न्यूक्लियर डस्ट को निकालेंगे और उसे खत्म कर देंगे, चाहे वह ईरान में हो या अमेरिका में.’ ट्रंप ने इसके लिए अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स और उनके पायलटों की भी तारीफ की.
क्या ईरान तैयार नहीं है?
ट्रंप के दावे के कुछ घंटे पहले ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने समझौते की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर दिए थे. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि रविवार को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ पर हस्ताक्षर नहीं होंगे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में समझौता होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बघाई ने कहा कि दूसरी तरफ की हिचकिचाहट को देखते हुए किसी भी तारीख पर अंतिम टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
यूरोप में नहीं, अब ऑनलाइन होगी साइनिंग
शुरुआत में योजना थी कि समझौते पर यूरोप में आमने-सामने हस्ताक्षर होंगे और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इसमें शामिल होंगे. लेकिन अब यह योजना बदल गई है. अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा और कार्यक्रम संबंधी व्यस्तताओं के कारण अब समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कराए जाएंगे. बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि एक वर्चुअल बैठक में समझौता ज्ञापन पर डिजिटल साइन करेंगे. मध्यस्थता में पाकिस्तान और कतर की भूमिका बताई जा रही है.
आखिरी वक्त का डर
अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता कराने वाले देशों को चिंता है कि अगर समझौते पर जल्दी हस्ताक्षर नहीं हुए तो कोई नई घटना पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है. यही वजह है कि अब आमने-सामने समारोह की जगह जल्द से जल्द ऑनलाइन साइनिंग कराने पर जोर दिया जा रहा है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या रविवार को ट्रंप का दावा सच साबित होता है या फिर ईरान एक बार फिर इस डील को आगे खिसका देता है.