जिस डॉक्टर को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, अगर उसी के दिल से इंसानी मौत का सम्मान और संवेदना खत्म हो जाए तो क्या हो? मुंबई के मशहूर केईएम (KEM) अस्पताल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार ने एक लाइव शो में मनोरंजन के नाम पर पोस्टमार्टम प्रक्रिया और रिसर्च के लिए दान किए गए शवों का जो सरेआम भद्दा मजाक उड़ाया उसने पूरी मेडिकल बिरादरी और इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया.
सोशल मीडिया पर रोंगटे खड़े कर देने वाले इस बयान का वीडियो वायरल होते ही ऐसा हाहाकार मचा कि अस्पताल प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा. प्रशासन ने इस घोर संवेदनहीनता पर कड़ा हंटर चलाते हुए आरोपी छात्रा को तत्काल प्रभाव से 15 दिनों की फोर्स लीव पर भेज दिया है और उसके कॉलेज, हॉस्टल व अस्पताल परिसर में कदम रखने तक पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है.
सेजल पवार विवाद से जुड़ी 5 मुख्य बातें
• विवादित बयान का वायरल वीडियो: कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक लाइव स्टैंड-अप शो के दौरान दर्शकों में बैठी केईएम अस्पताल की थर्ड-ईयर एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार ने मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन (शव विच्छेदन) के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों और उनके प्राइवेट पार्ट्स को लेकर आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणी की थी.
• अस्पताल प्रशासन का कड़ा एक्शन: वीडियो वायरल होने और भारी जनाक्रोश के बाद केईएम अस्पताल के डीन हरीश पाठक ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और सेजल पवार को तत्काल प्रभाव से 15 दिनों की फोर्स लीव पर भेज दिया.
परिसर और हॉस्टल में नो-एंट्री: अगले 15 दिनों तक सेजल पवार के केईएम अस्पताल परिसर, मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. वह इस दौरान किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगी.
Advertisement
• पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच: अस्पताल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है जो अगले 7 दिनों के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपेगी.
• परिवार के हवाले किया गया: प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि वीडियो में दिख रही लड़की सेजल पवार ही है, कॉलेज प्रशासन ने उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया है और उसके इस कृत्य को पूरी तरह अस्वीकार्य माना है.
क्या मेडिकल एथिक्स और संवेदनशीलता भूल रहे हैं भावी डॉक्टर्स?
यह घटना केवल एक छात्रा के भद्दे मजाक या किसी स्टैंड-अप कमिटी शो की विवादित क्लिप तक सीमित नहीं है बल्कि यह मेडिकल एथिक्स पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है. मेडिकल की पढ़ाई में एनाटॉमी और डिसेक्शन (शव विच्छेदन) को बेहद गंभीर और सम्मानजनक प्रक्रिया माना जाता है. जो लोग विज्ञान और समाज की भलाई के लिए मरणोपरांत देहदान करते हैं, उनके शवों को कैडेवर (Cadaver) कहा जाता है और छात्रों को पहली कक्षा में ही सिखाया जाता है कि इन मृत शरीरों का सम्मान उनके पहले शिक्षक की तरह होना चाहिए.
एक लाइव शो में लोकप्रियता या चंद पलों की वाहवाही और हंसी के लिए दान किए गए शवों के अंगों, पोस्टमार्टम की बारीकियों और पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स का उपहास उड़ाना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं भावी डॉक्टरों में मानवीय संवेदनाओं और पेशेवर गंभीरता की भारी कमी आ रही है. केईएम अस्पताल द्वारा लिया गया यह कड़ा एक्शन अन्य मेडिकल छात्रों के लिए एक कड़ा संदेश है कि सोशल मीडिया अटेंशन के चक्कर में चिकित्सा पेशे की गरिमा और मर्यादा को तार-तार करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती.