ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे बड़ा कैंसर है. दुनियाभर की महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से अपनी जान गवां रही हैं. अधिकतर महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के बारे में तीसरी या फिर चौथी स्टेज पर पता चलता है जिस वजह से महिलाओं के इलाज में काफी समस्या आती है. हाल ही में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर नई रिसर्च सामने आई है. जिसमें पता है चला कि महिलाएं को ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क के बारे में नहीं पता है.
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण को टच या देखकर पता नहीं लगा सकते हैं. ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस में अक्सर बताया जाता है कि ब्रेस्ट को टच या देखकर कैंसर के बारे में अंदाज लगा सकते हैं नई स्टडी में खुलास किया है कि ऐसा नहीं है. Cambridge University की रिसर्च के मुताबिक लंबे समय तक ब्रेस्ट डेंसिटी की वजह से कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है. ब्रेस्ट डेंसिटी के बारे में केवल mammograms और ultrasound से ही पता चल पाता है.
ब्रेस्ट डेंसिटी क्या है
ब्रेस्ट डेंसिटी का मतलब है कि ब्रेस्ट में फैट की तुलना में फाइब्रो और ग्लैड्यूलर टिश्यूज ज्यादा होते हैं. इस कंडीशन को डेंस ब्रेस्ट कहते हैं. अधिकतर महिलाएं में ब्रेस्ट डेंसिटी की समस्या देखने को मिलती है. लेकिन इस बारे में बहुत ही कम महिलाओं को जानकारी होती है. ब्रेस्ट डेंसिटी ब्रेस्ट कैंसर का सबसे बड़ा कारण हो सकता है.
मैमोग्राफी से चलता है पता
रिसर्च के अनुसार ब्रेस्ट डेंसिटी के बारे में मैमोग्राफी से ही पता चलता है. मैमोग्राफी की मदद से ब्रेस्ट डेंसिटी का पता सकते हैं. लेकिन खुद से ब्रेस्ट डेंसिटी के बारे में महिलाएं पता नहीं कर सकती हैं. इसके अलावा अल्ट्रासाउंड या एमआरआई MRI की मदद से ब्रेस्ट डेंसिटी की जांच करवा सकते हैं.
कब करानी चाहिए मैमोग्राफी
40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी करानी चाहिए.
इसके अलावा डेंस ब्रेस्ट का पता करने के लिए अल्ट्रासाउंड या MRI करवानी चाहिए.
हेल्दी डाइट
कैंसर की बीमारी का क्या कारण इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. लेकिन रिसर्च और एक्सपर्ट के अनुसार अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत खानपान, नींद की कमी, चीनी का अधिक, शराब का सेवन, तंबाकू का सेवन करने से कैंसर होने का रिस्क बढ़ जाता है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए आप हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें. हेल्दी फूड्स का सेवन करें.