G7 से तिलमिलाए चीन का बड़ा ऐलान, अब बनाएगा अपना अलग ग्रुप, किन देशों को न्योता भेजेंगे जिनपिंग?

बीजिंग: फ्रांस में दुनिया के सबसे अमीर देशों के संगठन G7 समिट का मंच सजा, इस महा-बैठक में चीन को न्योता नहीं दिया गया था. जिसकी वजह से बीजिंग बुरी तरह तिलमिला उठा है. शी जिनपिंग ने चुप बैठने के बजाय अमेरिका और उसके अमीर साथी देशों को पछाड़ने के लिए एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है. जैसे ही जी-7 समिट खत्म हुआ, चीन ने ऐलान कर दिया कि वो खुद का एक अलग ग्लोबल ग्रुप बनाने जा रहा है, जिसका नाम ‘ग्लोबल एआई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन’ होगा. अब सबसे बड़ा सवाल है कि इस नए ग्रुप में शामिल होने के लिए जिनपिंग आखिर किन देशों को न्योता भेज रहे हैं और इसके पीछे असली गेम प्लान क्या है?

क्या है चीन का प्लान?
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दुनिया भर के पत्रकारों के सामने साफ कर दिया कि चीन अब पूरी दुनिया की कमान अपने हाथ में लेने की तैयारी कर चुका है और Global AI Cooperation Organization के जरिए कई देशों के साथ एक अलग ग्रुप बनाना चाहता है.

जी-7 समिट से बाहर रखे जाने के बाद चीन अच्छी तरह समझ गया है कि अमेरिका और यूरोपीय देश उसे कभी आगे बढ़ने नहीं देंगे. यही वजह है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि चीन इस नए वैश्विक संगठन को बहुत तेजी से खड़ा कर रहा है और इसमें शामिल होने के लिए सभी का स्वागत करता है.

किन देशों को अपने इस ग्रुप में शामिल करेगा चीन?
ग्लोबल साउथ के देश: चीन का सबसे बड़ा दांव उन विकसित और विकासशील देशों पर है, जो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में फैले हैं. इन देशों को पश्चिमी देशों के रहमों-करम पर छोड़ दिया जाता है और चीन अब इन्हें तकनीक का लालच देकर अपने साथ ला रहा है.

ब्रिक्स (BRICS) और एससीओ (SCO) के साथी: चीन के शीर्ष आर्थिक नीति निर्माता झाओ हैबिंग ने साफ किया कि बीजिंग इस नए ग्रुप को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स देशों और शंघाई सहयोग संगठन के मंच का पूरा इस्तेमाल करेगा. इसका मतलब है कि इस ग्रुप में रूस और ईरान जैसे देश भी फ्रंट सीट पर नजर आएंगे.

अमेरिका से नाराज देश: जो देश अमेरिकी प्रतिबंधों या उसकी दादागिरी से परेशान हैं, चीन उन्हें इस एआई ग्रुप में शामिल होने का खुला न्योता दे रहा है ताकि अमेरिका के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा किया जा सके.

चीन की इस तिलमिलाहट और अचानक किए गए इस बड़े एलान के पीछे असल में अमेरिका की एक सीक्रेट रिपोर्ट है, जिसने बीजिंग के होश उड़ा दिए थे. जी-7 समिट के दौरान एक खुफिया कूटनीतिक रिपोर्ट लीक हुई, जिसमें ये बात सामने आई कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान मिलकर एक बहुत बड़ा खेल खेल रहे हैं.
ये अमीर देश मिलकर एक ऐसा प्लान बना रहे हैं जिसके तहत अमेरिका में बने सुपर-एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल्स का एक्सेस केवल उनके कुछ ‘भरोसेमंद पार्टनर्स’ को ही दिया जाएगा. यानी अमेरिका कूटनीतिक तौर पर दुनिया को दो हिस्सों में बांट रहा है, जहां बेहतरीन तकनीक पर सिर्फ पश्चिमी देशों और उनके चमचों का कब्जा होगा. जब ये बात जी-7 के बंद कमरों से बाहर आई तो चीन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने तुरंत अपना खुद का ग्रुप बनाने का फैसला कर लिया.

अमेरिका के ‘अहंकार’ पर चीन का वार
चीन ने इस बार अमेरिका पर हमला करने के लिए बहुत ही शातिर रणनीति चुनी है. चीन ने अमेरिका की सबसे कमजोर नस पर हाथ रख दिया है, और वो है ‘पैसा और पाबंदी’.
चीन ने अपनी ग्लोबल गवर्नेंस पर एक व्हाइटपेपर जारी किया, जिसमें अमेरिका के रवैये को ‘मनमानी करने वाला, मतलबी और सब कुछ अपनी मुट्ठी में रखने वाला’ बताया गया. चीन ने अमेरिका को टक्कर देने के लिए ये नया फॉर्मूला निकाला है.

सब्सक्रिप्शन बनाम फ्री सर्विस: अमेरिका के जितने भी बड़े और ताकतवर AI मॉडल्स हैं, वो बहुत महंगे हैं और उनके लिए भारी सब्सक्रिप्शन फीस देनी पड़ती है. इसके उलट, चीन दुनिया को बिल्कुल मुफ्त या बेहद सस्ते एआई मॉडल्स दे रहा है, जिन्हें पूरी तरह से डाउनलोड किया जा सकता है.

टेक्नोलॉजी और टैलेंट ट्रांसफर: चीन ने ‘AI कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर ऑल’ नाम की एक नई मुहिम शुरू की है. इसके जरिए वो गरीब और विकासशील देशों को न सिर्फ अपनी तकनीक देगा, बल्कि उनके लोगों को ट्रेनिंग भी देगा.

संयुक्त राष्ट्र (UN) का समर्थन: चीन दिखावे के लिए संयुक्त राष्ट्र को आगे रख रहा है ताकि दुनिया को ये भरोसा दिलाया जा सके कि उसका ग्रुप पूरी तरह से नियम और इंसानी भलाई के लिए काम करेगा.

ट्रंप के ‘AI एक्शन प्लान’ से शुरू हुई थी जंग
ये कोई पहली बार नहीं है जब दोनों महाशक्तियां इस मुद्दे पर आमने-सामने आई हैं. असल में इस पूरी जंग की नींव कुछ समय पहले ही पड़ गई थी, जब ट्रंप प्रशासन ने विदेशों में अमेरिकी तकनीक और एआई के दबदबे को बढ़ाने के लिए एक आक्रामक ‘एआई एक्शन प्लान’ का एलान किया था. ट्रंप के इस कदम के तुरंत बाद चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने शंघाई में एक बड़ी कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ कर दिया था कि चीन चुप नहीं बैठेगा और वो एक अलग अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाकर रहेगा.

हालांकि, पिछले महीने भारत, अमेरिका और चीन ने मिलकर AI सिक्योरिटी को लेकर कुछ बुनियादी नियम बनाने पर सहमति जताई थी, लेकिन जी-7 के इस हालिया घटनाक्रम ने उस पूरी बातचीत पर पानी फेर दिया है. अब ये साफ हो चुका है कि आने वाले दिनों में दुनिया केवल हथियारों या व्यापार के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि एआई तकनीक के मोर्चे पर भी एक नए ‘कोल्ड वॉर’ की गवाह बनने जा रही है. अब देखना ये होगा कि जिनपिंग के इस नए ग्रुप के न्योते को दुनिया के कितने देश स्वीकार करते हैं और अमेरिका इस चीनी घेराबंदी को तोड़ने के लिए क्या नया पैंतरा अपनाता है.