लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मेरठ से प्रयागराज के बीच बने गंगा एक्सप्रेसवे सबसे लंबा है. इसकी लंबाई 594 किमी है. लेकिन अब इसे भूल जाइए. अब उत्तर प्रदेश में नया सुपर एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जिसकी लंबाई 700 किमी होगी. यह ग्रीनफ़ील्ड सुपर एक्सप्रेसवे ना सिर्फ प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ़्तार देगा, बल्कि पूरे यूपी में बेहतर कनेक्टिविटी का जरिया भी बनेगा. योगी सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है.
दरअसल, प्रदेश की योगी सरकार सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है. पिछले करीब 9 सालों में प्रदेश में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया गया है, जिसमें से कई तो चालू भी हो गए हैं, जबकि अन्य पर काम तेजी से चल रहा है. इस बीच सरकार ने गोरखपुर से शामली तक 700 किलोमीटर लंबे नए ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट ना सिर्फ आर्थिक विकास और यातायात व्यवस्था को नई गति देगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा.
पूर्वी यूपी से पश्चिम तक कनेक्टिविटी
यह नया सुपर एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर पश्चिमी यूपी के शामली जिले तक जाएगा. पूरी तरह ग्रीनफील्ड पर आधारित इस प्रोजेक्ट से पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे न सिर्फ यात्रा का समय काफी कम होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, व्यापार और औद्योगिक विकास को भी बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है.
क्या होगा रूट मैप?
यह सुपर एक्सप्रेसवे गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, हरदोई, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, और संत कबीर नगर के रास्ते शामली से जुड़ेगा. इतना ही नहीं इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से नेपाल बॉर्डर से दिल्ली एनसीआर तक सीढ़ी पहुंच होगी. इसके निर्माण से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि उत्पादों के परिवहन और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही दिल्ली-लखनऊ-गोरखपुर कॉरिडोर पर मौजूदा समय में जो दबाव है वह कम होगा. इसके निर्माण से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे.