अमरनाथ यात्रा के दौरान भगवान शिव के भक्तों को आसमान से लेकर जमीन तक सुरक्षा कवच दिया जाएगा. इसके लिए जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से लेकर नुनवान-पहलगाम और बालटाल बेस कैंप तक कई लेयर वाला संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था तंत्र तैयार किया गया है. यह साझा सुरक्षा तंत्र इस बार अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा. इसके लिए नेशनल हाईवे (NH-44) पर सेना, बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस का कड़ा पहरा और निगरानी तंत्र एक्टिव मोड में है.
काजीगुंड से नुनवान बेस कैंप और बालटाल बेस कैंप तक BSF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती के साथ दर्जनों नए सुरक्षा बंकर बनाए गए हैं. ये बंकर आधुनिक हथियारों से लैस हैं और हर बंकर की निगरानी आधुनिक CCTV कैमरों के जरिए की जा रही है.
‘ऑपरेशन हॉक्स आई’
जैसे ही सभी तीर्थयात्री नवयुग टनल (Navyug Tunnel) से कश्मीर में प्रवेश करेंगे, वो जम्मू-कश्मीर पुलिस के ‘ऑपरेशन हॉक्स आई’ के दायरे में आ जाएंगे. यह ऑपरेशन इस साल अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से चलाया जा रहा है.
अनंतनाग से पहलगाम और बालटाल जाने वाली मुख्य सड़क पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. बंकर-दर-बंकर लगातार गश्त की जा रही है. दोनों रास्तों पर अचानक चेकिंग और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
गाड़ियों को सड़क पर बेवजह रुकने नहीं दिया जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्य यात्रा मार्ग से जुड़ने वाली हर छोटी सड़क (बाय-लेन) पर चेकपॉइंट बनाया गया है. यहां मैनुअल तलाशी के अलावा हाई-टेक सर्विलांस ग्रिड भी लगाया गया है.
हाईटेक सुरक्षा ग्रिड-CCTV, ड्रोन और RFID कार्ड से निगरानी
इन सभी चेकिंग पॉइंट्स को पार करने के बाद तीर्थयात्री श्री अमरनाथ यात्रा के दो मुख्य बेस कैंप- नुनवान और बालटाल तक पहुंचते हैं. इन दोनों जगहों पर बड़ा सुरक्षा ग्रिड लगाया गया है, जिसकी देखरेख JKP और CRPF कर रहे हैं.
ये दोनों बेस कैंप CCTV, ड्रोन, स्नाइपर और X-ray मशीनों जैसे बड़े सर्विलांस सिस्टम की निगरानी में हैं. यहां तीर्थयात्रियों और उनके वाहनों की भी जांच की जाती है.
तीर्थयात्रियों को RFID (Radio Frequency Identification) कार्ड जारी किए गए हैं. यह एक कॉन्टैक्टलेस स्मार्ट कार्ड है, जो रेडियो तरंगों के जरिए वायरलेस तरीके से रीडर को डेटा भेजता है. जिन तीर्थयात्रियों के पास ये स्मार्ट कार्ड होंगे, वही पवित्र यात्रा कर सकेंगे.
पवित्र गुफा तक सुरक्षा का अभेद्य घेरा
पवित्र गुफा तक जाने वाले दोनों रास्तों पर करीब 1 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें इंटेलिजेंस विंग के जवान भी शामिल हैं. इसके अलावा यात्रा की सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की 670 अतिरिक्त बटालियन और SFF (स्पेशल फ्रंटियर फोर्स) की एक विशेष बटालियन भी भेजी है.
जॉइंट कंट्रोल रूम से निगरानी
ये सभी सुरक्षाबल एक जॉइंट कंट्रोल रूम के तहत मिलकर काम कर रहे हैं. तालमेल बनाए रखने और हर स्थिति से निपटने की तैयारी के लिए NH-44, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड, बाजारों, सुरक्षा ठिकानों और तीर्थयात्री कैंपों जैसी सभी संवेदनशील जगहों पर संयुक्त रूप से दर्जनों मॉक ड्रिल की जा रही हैं.
‘स्टैंड-ऑफ फायर रिस्पॉन्स’
सिर्फ कस्बों में ही तलाशी और गश्त नहीं हो रही है, बल्कि बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले को ध्यान में रखते हुए जंगलों में भी गश्त, तलाशी और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है.
श्री अमरनाथ यात्रा से पहले तैनात संयुक्त सुरक्षा बलों ने ‘स्टैंड-ऑफ फायर रिस्पॉन्स’ यानी दूर से गोलीबारी की स्थिति में जवाबी कार्रवाई का अभ्यास किया.
पीर पंजाल में मॉक ड्रिल
अनंतनाग पुलिस ने पीर पंजाल पहाड़ों के पहलगाम वन क्षेत्र में ‘स्टैंड-ऑफ फायर रिस्पॉन्स’ मॉक ड्रिल की. इसका मकसद आतंकी हमले की स्थिति में सुरक्षा इंतजामों और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को परखना था. यह JKP (जम्मू-कश्मीर पुलिस), CAPF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त अभ्यास था.
QRT और QAT ने परखी तैयारी
इस ड्रिल में ऐसी हाई-रिस्क स्थिति का अभ्यास किया गया, जिसमें दूर से गोलीबारी हो रही हो और QRT (क्विक रिएक्शन टीम) तथा QAT (क्विक एक्शन टीम) को तुरंत रणनीतिक कार्रवाई करनी पड़े. इस अभ्यास में खतरे की पहचान, तेजी से तैनाती, इलाके को अलग करना, टैक्टिकल मुकाबला और ऑपरेशन के दौरान तालमेल के साथ जवाबी कार्रवाई की तैयारी को परखा गया.
IGP कश्मीर का भरोसा- हर स्थिति से निपटने को तैयार
तैयारियों को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी कश्मीर वी कुमार बिरधी ने बताया कि ‘श्री अमरनाथ यात्रा’ के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं. सुरक्षाबलों की तैनाती हो चुकी है. हर स्थिति से निपटने के लिए हम सभी पूरी तरह तैयार हैं. उम्मीद है कि इस बार यात्रियों को और बेहतर सुरक्षा मिलेगी और उनकी सेवा भी पहले से बेहतर रहेगी.