बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना के दौरान सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद पर हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इस निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना के दौरान सरस्वती वंदना और विभिन्न मंत्रों के वाचन को अनिवार्य किया गया था। इस निर्देश को राज्य के कुछ याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में मांग की गई थी कि सरकार के इस आदेश को असंवैधानिक घोषित कर इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष निम्नलिखित तर्क रखे थे –
अनुच्छेद 28 का उल्लंघन: दलील दी गई कि राज्य द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या अनुष्ठान नहीं कराए जा सकते, जो संविधान के अनुच्छेद 28 की भावना के विपरीत है।
संवैधानिक अधिकारों का हनन: याचिका में दावा किया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गरिमामय जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
धर्मनिरपेक्षता पर जोर: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विद्यालय वैज्ञानिक दृष्टिकोण के केंद्र होने चाहिए, न कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा के प्रचार के माध्यम।
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और उनकी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस निर्णय के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रार्थना सभाओं में सरस्वती वंदना और निर्दिष्ट मंत्रों का वाचन पूर्ववत जारी रहेगा।
यह निर्णय राज्य सरकार के उस निर्देश पर मुहर लगाता है, जिसका उद्देश्य विद्यालयों में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना बताया गया था।