उत्तराखंड के चमोली में आवासीय मकान में चल रहा था मदरसा, हिंदू संगठनों का प्रदर्शन

गोपेश्वर। ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के एक आवासीय मकान में अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसे को लेकर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बावजूद बंद कमरों में नियम विरुद्ध मदरसा संचालित हो रहा है। संगठन ने पुलिस-प्रशासन से इसकी शिकायत कर तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बताया गया कि बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को नगर के एक आवासीय मकान में लंबे समय से चोरी-छिपे मदरसा संचालित होने की सूचना मिल रही थी।

मासिक वेतन 12,000 रुपये
गुरुवार को संगठन के कार्यकर्ता उक्त मकान में दाखिल हुए, जहां पता चला कि बच्चों को पढ़ाने के लिए 12,000 रुपये मासिक वेतन पर एक शिक्षक को नियुक्त किया गया था। कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अवैध एवं नियम विरुद्ध बताया और मौके पर मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों को तुरंत मदरसा बंद करने को कहा। साथ ही पुलिस को भी मौके पर बुला लिया।

विहिप के प्रांत संत संपर्क प्रमुख पवन राठौर ने कहा कि उत्तराखंड में एक जुलाई से मदरसा बोर्ड पूरी तरह खत्म हो चुका है। बावजूद इसके बंद कमरों में मदरसे का संचालन कानून का सीधा उल्लंघन है। कहा कि देवभूमि में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस-प्रशासन को इसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। बजरंग दल अध्यक्ष शुभम रावत ने कहा कि आवासीय मकान के अंदर गुपचुप तरीके से मदरसा चलाया जा रहा था। जबकि, मदरसा शिक्षक मिन्नादुल्ला का कहना है कि वह यहां पर बच्चों को भाषा सिखाने का काम करते हैं। उनका मकसद किसी भी नियम को तोड़ना नहीं, बल्कि बच्चों को भाषा का ज्ञान देना है।