गुना: एमपी सरकार ने मठ-मंदिरों की माफी जमीनों को नीलाम करने के फैसले के विरोध में संत-महंत ने गुना में मोर्चा खोल दिया है। भुजरिया तालाब स्थित प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में मठ मंदिर पुजारी संघ जिला गुना की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता महंत राघवेंद्र दास महाराज ने की।
पुजारियों को भेजे हैं नोटिस
राघवेंद्र दास महाराज और पं. लखन शास्त्री ने कहा कि सिर्फ गुना में लगभग 247 से अधिक मंदिरों के पुजारियों को नोटिस भेजे गए हैं। जो अलग-अलग तारीखों के हैं। वक्ताओं के अनुसार वर्तमान सरकार ने प्राचीन मठ-मंदिरों की जमीनों को नीलाम करने के उद्देश्य से पुजारियों को नोटिस जारी किए हैं, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण हैं।
सरकार की नहीं हैं जमीनें
संतों ने स्पष्ट किया कि ये प्राचीन मंदिर और इनसे लगी जमीनें न तो सरकार की हैं और न ही सरकार ने इन्हें दान में दिया है। ये संपत्तियां प्राचीन काल में मंदिर बनवाने वाले राजाओं और दानदाताओं द्वारा भगवान के भोग, मंदिर के रखरखाव, सेवा-पूजा और पुजारियों के भरण-पोषण के लिए समर्पित की गई थीं।
पुजारियों को घोषित करें सरकारी कर्मचारी
पुजारी संघ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार को लगता है कि यह संपत्ति और जमीनें उसकी हैं, तो सरकार इन्हें अपने अधीन ले ले, लेकिन इसके बदले में वे मंदिरों के पुजारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करें। इसके साथ ही शासकीय सेवकों की तरह पुजारियों को भी प्रतिमाह पूर्ण वेतन, भत्ते और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।
भोपाल में बड़े आंदोलन की चेतावनी
संतों ने कहा कि सरकार के इस तानाशाही आदेश के खिलाफ शीघ्र ही एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत संघ के पदाधिकारी हर गांव, ब्लॉक और तहसील स्तर पर जाकर पुजारियों को एकजुट करेंगे और बैठकें लेंगे। इसके बाद राजधानी भोपाल में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते मांगें स्वीकार नहीं की गईं, तो पूरे मध्य प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मंदिरों की जमीन पर सरकार की नजर
कांग्रेस के रजनीश शर्मा ने कहा कि जो लोग भगवान राम के नाम पर वोट मांगते हैं, वे लोग राम मंदिर की दानराशि तक नहीं बचा पाए। अब वही खेल गुना में खेलने की तैयारी है। कांग्रेस का आरोप है कि गुना जिले के 247 सरकारी मंदिरों में से करीब 20 बड़े मंदिरों की 50 बीघा से अधिक जमीन पर भाजपा सरकार और उसका तंत्र नजर गड़ाए बैठा है। पुजारियों, साधु-संतों और मंदिरों की आजीविका पर हमला करने की तैयारी है। कांग्रेस ने कहा कि जो जमीनें मंदिरों को दान में मिलीं, उन्हें सरकार ठेके-नीलामी और प्रशासनिक नियंत्रण के नाम पर हड़पना चाहती है। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि भगवान, आस्था और सनातन पर सीधा हमला है।