आज के समय में अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना हर दूसरे युवा का सपना है. लेकिन भाई, एक एंटरप्रेन्योर या बिजनेसमैन बनना कोई बच्चों का खेल नहीं है. इसमें आपको एक साथ सौ काम संभालने पड़ते हैं, जैसे सही स्ट्रेटजी बनाना, पैसों का जुगाड़ करना और पूरी टीम को लीड करना.
जब हर दिन नए और कड़े फैसले लेने हों, तो दिमाग का एक्टिव रहना बहुत जरूरी है. ऐसे में बिजनेस को सही दिशा दिखाने के लिए आचार्य चाणक्य से बेहतर गुरु कोई नहीं हो सकता. चाणक्य ने ही एक साधारण से लड़के चंद्रगुप्त को भारत का सबसे महान सम्राट बनाया था. अगर आप भी नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो चाणक्य के ये 5 कड़वे सबक आपके बहुत काम आएंगे.अपनी प्लानिंग को हमेशा तिजोरी में बंद रखें
बिजनेस का पहला नियम यही है कि अपनी अगली चाल के बारे में किसी को कानों कान खबर न होने दें. जैसे एक जादूगर अपना जादू दिखाने से पहले उसकी ट्रिक किसी को नहीं बताता, ठीक वैसे ही आपको भी करना है.
जब तक आपकी प्लानिंग पूरी तरह जमीन पर न उतर जाए, उसे पूरी तरह गुप्त रखें. अगर आप जोश जोश में आकर अपना सीक्रेट प्लान हर किसी से शेयर करने लगेंगे, तो मार्केट में बैठे आपके विरोधी उसका फायदा उठा सकते हैं.
इससे आपकी महीनों की मेहनत पर एक पल में पानी फिर सकता है, इसलिए काम होने तक चुप्पी साधे रखें.
रोज कुछ नया सीखने की आदत डालें
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक सफल इंसान बनने के लिए सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए. चाहे कोई अमीर घर में पैदा हुआ हो या गरीब, यह नियम सब पर बराबर लागू होता है.
जो बंदा यह सोच लेता है कि उसे सब कुछ आता है, उसका डूबना तय है. चाणक्य नीति के मुताबिक, आपको हर दिन कुछ न कुछ नया जरूर सीखना चाहिए, भले ही वह एक छोटा सा अक्षर ही क्यों न हो.
आज के समय में भी एलन मस्क और वॉरेन बफेट जैसे दुनिया के सबसे अमीर लोग हर दिन घंटों किताबें पढ़ते हैं और नई चीजें सीखते हैं.
गलत पार्टनर चुनना पड़ सकता है भारी
बिजनेस में आप अकेले पूरी सेना नहीं बन सकते, आपको लोगों के साथ और मदद की जरूरत पड़ेगी ही. लेकिन यहां सबसे बड़ा खेल यह है कि आप अपना पार्टनर किसे चुनते हैं. चाणक्य ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि एक गलत या धोखेबाज पार्टनर खुले दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक होता है. दुश्मन को तो आप सामने से आते हुए देख सकते हैं, लेकिन एक छुपा हुआ गद्दार आपको सीधे खाई में धकेल देता है.
इसलिए चाहे अपनी कंपनी में किसी को ऊंचे पद पर रखना हो या किसी को बिजनेस पार्टनर बनाना हो, आंख बंद करके भरोसा बिल्कुल न करें.
जरूरत पड़ने पर कड़ा रुख अपनाना है जरूरी
जब आप एक कंपनी चलाते हैं, तो कई बार ऐसी सिचुएशन आती है जहां आपको एक सख्त बॉस बनना पड़ता है. सहकर्मियों या काम करने वालों के साथ कभी कभी कड़वी बातचीत भी करनी पड़ती है. ऐसी स्थिति में ज्यादा सीधा बनना नुकसानदेह हो सकता है. चाणक्य ने एक बहुत बढ़िया उदाहरण दिया है कि एक बिना जहर वाला सांप भी अगर फुफकारना छोड़ दे, तो लोग उसे कुचल देंगे.
इसलिए खुद को बचाने के लिए सांप को भी जहरीला होने का नाटक करना पड़ता है. बिजनेस में भी अपनी बात मनवाने और इज्जत बनाए रखने के लिए समय पर कड़क होना बहुत जरूरी है.
नुकसान के डर से भागें नहीं, उस पर वार करें
स्टार्टअप की दुनिया में हमेशा सब कुछ अच्छा ही होगा, ऐसा सोचना बेवकूफी है. बिजनेस में उतार चढ़ाव और नुकसान होना आम बात है. कई लोग नुकसान के डर से अपने कदम पीछे खींच लेते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है.
चाणक्य कहते हैं कि डर को खुद पर हावी मत होने दो, बल्कि उस पर सामने से हमला करके उसे खत्म कर दो. अगर कभी बिजनेस में घाटा हो भी जाए, तो निराश होकर बैठना नहीं है. उस गलती से सीखें कि कहां चूक हुई, ताकि भविष्य में वह गलती दोबारा न हो और आप आगे बड़ा मुनाफा कमा सकें.