बागपत/चित्रकूट/मुजफ्फरनगर : यूपी के कई जिलों में बारिश मुसीबत बनने लगी है. बारिश से शहरों के हालात खराब हो गए हैं. सड़कों पर जलभराव के साथ बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस रहा है. वहीं ग्रामीण इलाकों में नदियों से कटान का सिलसिला शुरू हो चुका है. ऐसे में गांव लोग बाढ़ के खतरे से परेशान हैं और शासन-प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं. हालांकि शासन के निर्देश के बाद सभी जिलों में प्रशासनिक व आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं.
बागपत में यमुना के बाद हिंडन नदी का बढ़ रहा जलस्तर
बागपत जिले में लगातार हो रही बारिश से अब हिंडन नदी भी उफान पर है. यमुना के बाद हिंडन का बढ़ता जलस्तर ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर बरनावा स्थित महाभारतकालीन लाक्षागृह के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है. हिंडन नदी का पानी लाक्षागृह टीले तक पहुंच गया है. नदी का तेज बहाव महाभारतकालीन सुरंग से महज करीब तीन मीटर की दूरी पर है. यदि जलस्तर और बढ़ा तो सदियों पुरानी इस ऐतिहासिक सुरंग का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लाक्षागृह परिसर में संचालित गुरुकुल के विद्यार्थियों को सुरंग और नदी के किनारे जाने से मना कर दिया गया है.
गुरुकुल के सदस्य संजीव कुमार का कहना है कि प्रशासन और गुरुकुल प्रबंधन हालात पर नजर बनाए हुए हैं. यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो हिंडन का पानी लाक्षागृह सहित आसपास के गांवों के लिए खतरा बन सकता है.
चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 55 इलाके चिन्हित
बरसात का मौसम शुरू होते ही चित्रकूट में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं. जिले के बाढ़ प्रभावित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक कार्ययोजना लागू कर दी गई है. प्रशासन ने 55 संवेदनशील क्षेत्रों में एसडीआरएफ तैनात करने के साथ राहत व बचाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं. रामघाट पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है. बरदहा व धवईया नालों पर पुल न होने से ग्रामीणों में बारिश के दौरान आवागमन को लेकर चिंता बनी हुई है.
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि हर वर्ष प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों की स्थापना की तैयारी पूरी हो चुकी है. राहत सामग्री, नावों की व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है. संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम की स्थायी तैनाती की गई है.
रामघाट पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. यहां लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है. सिंचाई विभाग संवेदनशील स्थानों पर बैरियर लगा रहा है, जबकि घाट किनारे के दुकानदारों को समय रहते अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.
बता दें, मध्य प्रदेश की सीमा से सटे चित्रकूट के मानिकपुर थाना क्षेत्र से बहने वाली पहाड़ी नदी बरदहा जरा सी बारिश में उफना जाती है. जिससे नदी पर बने रपटे के ऊपर से पानी बहने लगता है और 4 गांवों की लगभग 4 हजार की आबादी का संपर्क सप्ताहभर के लिए टूट जाता है. हालांकि पुल निर्माण की मांग ग्रामीणों दशकों से कर रहे हैं. वहीं रानीपुर टाइगर क्षेत्र के गांव रानीपुर, कुबरी, गिदुरहा, जीगनवाह और कटरा भी जंगली नाले धवईया के उफान में आते ही मुख्यालय से कट जाते हैं. इन क्षेत्रों की लगभग 2500 आबादी को हर साल बारिश में संघर्ष से जूझना पड़ता है.
मुजफ्फरनगर में फिलहाल बारिश का असर कम है, लेकिन जिला प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है. उपजिलाधिकारी (राजस्व एवं वित्त) अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित टीमें क्षेत्रों में सक्रिय हैं. बारिश के दौरान राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित विभागों की टीमें लगाई गई हैं.
एसडीएम ने बताया कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अधिकांश कार्य सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 90 प्रतिशत पूरे कर लिए गए हैं. जिन स्थानों पर कुछ कार्य शेष हैं, वहां संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. जिन गांवों में आवश्यकता होगी वहां नावों की व्यवस्था की जाएगी. बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है. आपात स्थिति में लोग जिला आपदा कंट्रोल रूम या प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए आपदा कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है.