राजस्थान हाईकोर्ट ने ऊंटों की आबादी में भारी गिरावट पर चिंता जताई

राजस्थान में ऊंटों की आबादी में आई भारी गिरावट—लगभग 15 लाख से घटकर 1.5 लाख रह जाने—पर चिंता जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने और राज्य के इस पशु के संरक्षण, प्रजनन और स्वास्थ्य देखभाल के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताने का आदेश दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि पारंपरिक रूप से ऊंट पालने वाले समुदायों के धीरे-धीरे दूसरे कामों की ओर बढ़ने से बढ़ती जिम्मेदारी के बावजूद, राज्य सरकार ऊंट पालन और संरक्षण के लिए पर्याप्त सहायता देने में नाकाम रही है।

यह बात एक ‘सुओ मोटो’ (स्वतः संज्ञान) याचिका के दौरान सामने आई, जब एमिकस क्यूरी प्रतीक कसलीवाल ने राजस्थान में ऊंटों की आबादी में 15 लाख से 1.5 लाख तक की चिंताजनक गिरावट की ओर ध्यान दिलाया।

यह बात रखी गई कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा मिलने के बावजूद, पशुपालन विभाग ऊंट पालन और संरक्षण के लिए उचित सहायता देने में नाकाम रहा है।

एमिक्स क्यूरी ने आगे बताया कि पारंपरिक रूप से ऊंट पालन में लगे समुदाय इस काम को छोड़ रहे हैं, जबकि राज्य सरकार ऊंटों के लिए शेड और विशेष पशु चिकित्सा सुविधाओं सहित पर्याप्त बुनियादी ढांचा बनाने में नाकाम रही है।