जेल से साढ़े 11 साल बाद बाहर आए संतराम पाल के चरणों में नतमस्तक हुए 4 बार के मंत्री कौल सिंह, राजनीति से लिया सन्यास

मंडी. हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर एक बार फिर से राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान किया. इस दौरान उन्होंने संत रामपाल की शरण में जाकर सन्यास की बात दोहराई. संत रामपाल के आफिशियल फेसबुक अकाउंट पर कौल सिंह ठाकुर के उनसे मिलने और वार्तालाप का पूरा वीडियो शेयर किया गया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

मंडी के द्रंग से आठ बार के विधायक और चार बार के मंत्री रहे कौल सिंह ठाकुर अपनी धर्मपत्नी और अन्य रिश्तेदारों के साथ संत रामपाल की शरण में पहुंचे थे. यहां उन्होंने संत रामपाल की चप्पलों के आगे नतमस्तक होकर माथा टेका और संत रामपाल के चरणों में भी दंडवत प्रणाम किया.

उन्होंने संत रामपाल को बताया कि वे हिमाचल में 8 बार एमएलए, 4 बार मंत्री, 1 बार विधानसभा अध्यक्ष और 2 बार पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं और अब राजनीति से सन्यास लेकर उनकी शरण में आ गए हैं. उन्होंने हरियाणा के दिग्गज नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा से अपनी नजदीकियों का जिक्र भी किया. साथ ही उन्होंने संत रामपाल को हर वर्ष दो महीने, मई और जून में हिमाचल का प्रवास करने का निमंत्रण भी दिया और कहा कि वह शिमला के आसपास अपना ठिकाना बनाएं. कौल सिंह ने संत रामपाल को हिमाचली टोपी पहनाई जबकि उनकी धर्मपत्नी ने हिमाचल के आग्रेनिक फल भेंट किए. कौल सिंह ठाकुर ने अपनी पत्नी को ठीक करने की गुहार भी संत रामपाल से लगाई.

संत रामपाल ने कौल सिंह ठाकुर को दीक्षा लेने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इस जन्म में जो करना था, वो कर लिया अब अगले जन्म की तैयारी करो और भक्ति में डूब जाओ. संत रामपाल ने उन्हें मंत्र देने की बात भी कही जिसमें शक्ति होती है. यही नहीं, संत रामपाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि अध्यात्म रूपी बैटरी को चार्ज करने के लिए जो ऑरिजिनल चार्जर चाहिए होता है वह पूरे विश्व में सिर्फ उनके पास ही है. उन्होंने अपने अनुयायियों को कौल सिंह ठाकुर की खूब आव-भगत करने के निर्देश भी दिए.

गौर रहे कि संत रामपाल का हमेशा ही विवादों के साथ नाता रहा है. कुछ समय पहले उन्होंने देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी की थी और संत कबीर को ही सर्वोच्च बताया था. उन्होंने बाकी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना को व्यर्थ बताया था. हिमाचवल के हिंदू संगठनों ने इसका खूब विरोध भी किया था. इस संबंध में उस पर केस भी हुआ था. संत रामपाल कथित तौर पर कुछ को संत कहता है. वह उनका आश्रम सोनीपत के गोहाना में स्थित है. हाल ही में संत रामपाल करीब साढ़े 11 साल बाद जेल से बाहर आया था. 2016 में उसके आश्रम में काफी बवाल हुआ था. उस पर हिंदुओ के धार्मिक ग्रंथों समेत देशद्रोह समेत कई मामले चल रहे हैं और सजा भी हो चुकी है. हाल ही में वह जेल से जमानत पर बाहर आया था. हिसार में आश्रम में काफी बवाल के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था.