हर महीने अरबों का ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने वाला भारत का पसंदीदा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म UPI अब एक बड़े मेकओवर की तैयारी में है. अक्सर कमजोर नेटवर्क या इंटरनेट न होने के कारण से UPI पेमेंट अटक जाते हैं, जिससे लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है. लोगों की इसी मुसीबत को दूर करने की बड़ी तैयारी कर चल रही है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने जा रहा है.
NPCI एक ऐसा ऑफलाइन UPI सिस्टम तैयार कर रहा है, जिसकी सहायता से यूजर का स्मार्टफोन और दुकानदार की P.S मशीन, दोनों के ऑफलाइन होने पर भी टैप-एंड-पे के जरिए आसानी से पेमेंट हो जाएगा.
बिना इंटरनेट कैसे होगा पेमेंट? समझिए पूरा प्रोसेस
वर्तमान UPI सिस्टम में हर ट्रांजेक्शन के लिए बैंक से रियल-टाइम ऑथेंटिकेशन की जरूरत होती है, जिसके लिए इंटरनेट होना जरूरी है. लेकिन नया ऑफलाइन UPI सिस्टम इससे अलग होगा-
प्री-लोड बैलेंस
यूजर को ऑफलाइन जाने से पहले अपने स्मार्टफोन में एक तय सीमा तक की राशि सेफ तरीके से सेव रखनी होगी.
NFC का इस्तेमाल
दुकान पर पेमेंट करते समय यूजर को अपना फोन सिर्फ NFC-सक्षम P.S मशीन से टच या फिर टैप करना होगा.
पेमेंट की जानकारी सीधे फोन से मशीन में ट्रांसफर हो जाएगी. इस दौरान न तो मोबाइल डेटा की जरूरत होगी और न ही Wi-Fi की.
बाद में होगा सेटलमेंट
ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड दोनों डिवाइस में सेव हो जाएगा. जैसे ही किसी भी एक डिवाइस में इंटरनेट कनेक्ट होगा, बैंक को जानकारी भेजकर पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआत में इस ऑफलाइन सुविधा के जरिए ₹2,000 तक के पेमेंट करने की इजाजत मिल सकती है. इसका सबसे ज्यादा फायदा मेट्रो स्टेशनों, फ्लाइट्स, बेसमेंट और दूर-दराज के इलाकों में मिलेगा.
किन 3 तकनीकों पर काम करेगा यह सिस्टम?
NFC यानी नियर फील्ड कम्युनिकेशन
यह एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस टेक्नोलॉजी है, जो दो डिवाइस को बिना इंटरनेट आपस में कनेक्ट करती है.
ऑफलाइन टोकनाइजेशन
इसमें सीधे बैंक अकाउंट से पैसे कटने के बजाय पहले से स्टोर किए गए सुरक्षित डिजिटल टोकन का इस्तेमाल होता है, जिससे बैंक का डेटा भी सेफ रहता है.
डिफर्ड सेटलमेंट
इस मॉडल में पेमेंट तुरंत स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन पैसे का असली ट्रांसफर इंटरनेट कनेक्टिविटी आने के बाद होता है.
मौजूदा UPI Lite से कितना अलग है नया सिस्टम?
UPI Lite
इसमें बार-बार बैंक पासवर्ड डालने की जरूरत तो नहीं होती, लेकिन दुकानदार के पास इंटरनेट होना जरूरी होता है.
UPI Lite X
यह बिना इंटरनेट के काम करता है, लेकिन यह मुख्य रूप से दो लोगों के बीच डिवाइस-टू-डिवाइस पेमेंट के लिए बना है.
नया ऑफलाइन UPI
यह खास तौर पर व्यापारियों और दुकानों के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे बिना नेटवर्क के भी दुकानों पर बिक्री न रुके.
क्या इसमें फ्रॉड का खतरा है?
ऑफलाइन पेमेंट में सबसे बड़ा डर एक ही टोकन से दो बार पेमेंट यानी डबल स्पेंडिंग का होता है. NPCI इससे निपटने के लिए क्रिप्टोग्राफिक टोकन और डिवाइस-आधारित सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करेगा. एक बार टोकन इस्तेमाल होने के बाद वह अपने आप इनवैलिड हो जाएगा. साथ ही, ऑफलाइन लिमिट कम होने के कारण फोन चोरी या गुम होने पर भी बड़ा वित्तीय नुकसान नहीं होगा.
डिजिटल इंडिया के इस दौर में, जहां हर दिन औसतन 66 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, यह ऑफलाइन फीचर नेटवर्क कवरेज की समस्या को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा.