नई दिल्ली. ब्रिटेन की हाई-सिक्योरिटी जेलों में से एक एचएमपी चेम्सफोर्ड में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक महिला जेल ट्यूटर ने जेल में बंद एक कैदी के साथ अवैध संबंध बनाने की बात स्वीकार की है.
48 वर्षीय मेलिसा मर्फी (पहले मेलिसा ओ’ब्रायन) पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है. इस रिश्ते का खुलासा तब हुआ जब एक सहकर्मी ने उन दोनों के क्लासरूम को अंदर से बंद पाया. यह घटना न केवल आपराधिक न्याय प्रणाली की अखंडता पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे विश्वास के पदों का दुरुपयोग किया जा सकता है. वो क्लासरूम को अंदर से बंद कर संबंध बनाती थी.
चोरी-छिपे शुरू हुआ रिश्ता
मेलिसा मर्फी लगभग चार साल से एचएमपी चेम्सफोर्ड में ट्यूटर के रूप में काम कर रही थीं. उनकी मुलाकात इस कैदी से पहली बार 2023 की गर्मियों में हुई थी. मेलिसा ने दावा किया कि कैदी का पहला पत्र उन्हें उसी साल नवंबर में मिला था.
• नियमों का उल्लंघन: एसेक्स पुलिस के अनुसार, नियमों के विपरीत जाकर मेलिसा ने इस संपर्क की सूचना जेल प्रशासन को नहीं दी.
• पत्रों का आदान-प्रदान: इसके बजाय उन्होंने कैदी को जवाब दिया और दोनों ने कई पत्रों का आदान-प्रदान किया जिनसे पता चलता है कि उनके बीच संबंध शुरू हो चुका था.
बंद क्लासरूम में हुआ खुलासा
इस गुप्त रिश्ते पर संदेह तब गहराया जब जेल के एक अन्य कर्मचारी ने उस क्लासरूम में जाने की कोशिश की जिसमें सिर्फ मर्फी और कैदी मौजूद थे. दरवाजा अंदर से बंद था और मेलिसा ने अपनी चाबियां भी हटा रखी थीं. जेल नियमानुसार सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के पास हर समय चाबियां लगी रहनी चाहिए. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी कैदी चाबियों तक न पहुंच सके और भागने की कोशिश न कर सके. इस घटना की सूचना तुरंत दी गई और मेलिसा मर्फी को गिरफ्तार कर लिया गया.
बेडरूम में मिला सबसे बड़ा सबूत
गिरफ्तारी के बाद, एसेक्स पुलिस को मर्फी के घर से और भी पत्र मिले. सबसे बड़ा सबूत तब मिला जब उनके बेडरूम में कैदी की एक तस्वीर बरामद हुई. मर्फी को पहली बार 11 दिसंबर 2023 को गिरफ्तार किया गया और उन्हें तुरंत उनकी नौकरी से हटा दिया गया. 28 नवंबर को चेम्सफोर्ड क्राउन कोर्ट में हुई सुनवाई में मेलिसा मर्फी ने सार्वजनिक पद पर दुर्व्यवहार के एक आरोप को स्वीकार कर लिया.
विश्वास का उल्लंघन और जोखिम
जांच अधिकारी डिटेक्टिव कॉन्स्टेबल रेबेका स्पैरो ने कहा, “मर्फी ने इस अनुचित संबंध को बनाकर विश्वास के पद का दुरुपयोग किया. जेल में बंद कोई भी व्यक्ति एक कमजोर स्थिति में होता है. उन्होंने अपने और कैदी दोनों को खतरे में डाल दिया. इस रिश्ते से मर्फी ने अपनी ईमानदारी से समझौता किया और एक कमजोर व्यक्ति का शोषण किया और खुद को भी शोषण के लिए खुला छोड़ दिया. अब अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने का इंतजार है.